हिन्दू धर्म में सौभाग्य का प्रतीक है तिलक, दुर्भाग्य को बदलने की रखता है क्षमता

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हिन्दू धर्म में सौभाग्य का प्रतीक है तिलक, दुर्भाग्य को बदलने की रखता है क्षमता

-ईश्वर की पूजा में तिलक का अपना खास महत्व, जानें इसे लगाने की विधि और उपाय

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/दिल्ली/भावना शर्मा/- हिंदू धर्म में तिलक का खास महत्व बताया गया है। पूजा से लेकर किसी परंपरा की पूरी पहचान बताने वाले इस तिलक का न सिर्फ अपना धार्मिक महत्व है बल्कि इससे जुड़े सरल एवं प्रभावी उपायों को अपना कर आप अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हैं।
                   सनातन परंपरा में पूजा के दौरान प्रयोग में लाए जाने वाले तिलक का धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व होता है। प्रत्येक व्यक्ति के माथे पर लगे तिलक को देखकर आप उसकी पूरी धार्मिक परंपरा को जान सकते हैं. जैसे शैव, वैष्णव आदि अलग-अलग प्रकार का तिलक लगाते हैं। यह तिलक न सिर्फ धार्मिक पूजा के काम आता है, बल्कि नवग्रहों की शुभता के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। आइए इस पवित्र और सौभाग्यदायक तिलक के बारे में विस्तार से जानते हैंः-

कहां पर लगाएं तिलक
अमूमन हम लोग यही जानते हैं कि तिलक को किसी भी व्यक्ति के माथे पर लगाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है. पूजा में प्रयोग किया जाने वाला तिलक सिर, मस्तक, गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल 12 स्थानों पर लगाया जाता है। यदि सिर्फ माथे पर तिलक लगाना हो तो उसे ललाट बिंदु यानि दोनों भौहों के बीच में ही लगाना चाहिए।

कैसे लगाएं तिलक
आस्था से जुड़े इस तिलक को लगाने के कुछ नियम बनाए गये हैं, जैसे दृ तिलक हमेशा स्नान करने के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद ही किसी देवी या देवता या फिर किसी दूसरे व्यक्ति को या फिर स्वयं को लगाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति या देवी-देवता को उत्तर दिशा की ओर मुख करके ही तिलक लगाना चाहिए। अपने आराध्य देवी-देवता को हमेशा अनामिका उंगली से और दूसरों को अंगूठे से तिलक लगाना चाहिए।

कौन सा लगाएं तिलक
पूजा के दौरान हमेशा अपने आराध्य देवी-देवता या फिर अपने मनोकामना के अनुसार ही तिलक का प्रयोग करना चाहिए. जैसे यदि आप शैव परंपरा के उपासक हैं तो आपको विशेष रूप से भस्म का तिलक प्रयोग करना चाहिए। वहीं यदि आप वैष्णव परंपरा के उपासक हैं तो आपको चंदन का तिलक प्रयोग में लाना चाहिए। यदि शाक्त परंपरा से जुड़ी कोई पूजा कर रहे हैं तो आप रोली का तिलक लगा सकते हैं। इनके अलावा श्री हनुमान जी और गणपति की साधना में सिंदूर के तिलक का प्रयोग किया जाता है।

नवग्रहों से जुड़े तिलक
ज्योतिष के अनुसार आप तिलक के माध्यम से आप नवग्रहों से जुड़े दोष को दूर करके उनकी शुभता को प्राप्त कर सकते हैं. जैसे सूर्य ग्रह के लिए श्रीखंड, चंदन अथवा रक्त चंदन का तिलक, चन्द्र ग्रह की शुभता के लिए श्रीखंड, चंदन अथवा दही का तिलक, मंगल ग्रह की शुभता के लिए रक्त चंदन अथवा सिंदूर का तिलक, बुध ग्रह की शुभता के लिए सिंदूर का तिलक, बृहस्पति ग्रह की शुभता के लिए केसर, हल्दी, अथवा पीले चंदन का तिलक, शुक्र ग्रह की शुभता के लिए सिंदूर अथवा रक्त चंदन का तिलक और शनि ग्रह की शुभता के लिए भभूत अथवा रक्त चंदन का तिलक का प्रयोग कर सकते हैं।

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