हरियाणा में पराली जलाने के आरोप में 14 किसानों की गिरफ्तारी, कई जिलों में कार्रवाई जारी

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October 8, 2026

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हरियाणा में पराली जलाने के आरोप में 14 किसानों की गिरफ्तारी, कई जिलों में कार्रवाई जारी

मानसी शर्मा /-    हरियाणा के कैथल जिले में पराली जलाने के मामले में 14 किसानों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी सोमवार को एक पुलिस अधिकारी ने दी। हाल के दिनों में दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है। अधिकारी ने बताया कि पराली जलाने पर रोक के बावजूद कुछ किसानों के असहयोग के कारण पुलिस को यह कदम उठाना पड़ा है। इसके अलावा, हरियाणा के हिसार समेत अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की गई है।

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए किसान जिम्मेदार

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का एक प्रमुख कारण हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा फसल के अवशेष जलाना माना जाता है। कैथल जिले में अब तक 123 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। आमतौर पर, धान की फसल काटने के बाद किसान पराली जलाते हैं, जिससे धुएं का उत्सर्जन होता है और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। हर साल अक्टूबर और नवंबर में दिल्ली में प्रदूषण की शिकायतें बढ़ने लगती हैं।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी बहस हो चुकी है। अदालत ने हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सरकारों को प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के आदेश दिए हैं। कैथल के डीएसपी बीरभान के अनुसार, हाल ही में 14 किसानों को पराली जलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है।

इन किसानों के खिलाफ प्रदूषण रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पानीपत और यमुनानगर जिलों में भी कई किसानों के खिलाफ इसी तरह के मामले दायर किए गए हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव टी.वी.एस.एन. ने रविवार को डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिया कि पराली जलाने के मामलों पर नियंत्रण पाया जाए।

अदालत की सख्त चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल की सुनवाई में हरियाणा और पंजाब की सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें पराली जलाने को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। यदि किसान नहीं मानते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को समन जारी करते हुए 23 अक्टूबर को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया है।

जस्टिस अभय एस. ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और ए. जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि दोनों राज्य इस मामले में पूरी तरह असंवेदनशील हैं और प्रदूषण से निपटने के लिए दिए गए आदेशों पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच का समय बहुत कम होता है, जिसके चलते वे जल्दी खेत खाली करने के लिए पराली जलाते हैं, क्योंकि यह उनके लिए एक आसान और सस्ता विकल्प होता है।

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