सीआरपीएफ शहीदों के लिए नई योजनाओं की घोषणा ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि

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May 18, 2026

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सीआरपीएफ शहीदों के लिए नई योजनाओं की घोषणा ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि

-2017 व 2021 में सीआरपीएफ के जवानों ने दी सुप्रीम शहादत, प्रधानमंत्री से जवानों की शहादत पर नई घोषणाये करने की मांग
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कॉनफैडरएसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा  21 अप्रैल को गुरु तेग बहादुर के 400वे जन्मोत्सव के मौके पर लालकिले के लॉन से देश के नाम महत्वपूर्ण सन्देश देने को लेकर उम्मीद जताई कि इस विशेष अवसर पर उन सीआरपीएफ शहीदों के लिए भी नई योजनाओं का ऐलान करेंगे जो आए दिन देश की आन बान शान के लिए जान कुर्बान करते रहते हैं। यही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
                   उन्होने कहा कि यहां हम याद दिलाना चाहेंगे जब 24 अप्रैल 2017 में चिंतागुफा- चिंतलनार में 26 सीआरपीएफ जवान नक्सली भेंट व 4 अप्रैल 2021 नक्सलियों द्वारा वहशियाना हरकत जब सुकमा बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीहड़ों में सीआरपीएफ के जवानों ने नक्सली मुठभेड़ में सुप्रीम शहादत दी ये दोनों अप्रैल महीने के जघन्य घटनाएं है जो हमे हमारे जवानों की शहादत याद दिलाती है और साथ ही उन सरकारी दावों की पोल खोलती हैं जिनमें ये दावा किया जाता है कि सरकार जवानों की सुरक्षा के हर संभव प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होने कहा कि हम पुलवामा व गलवान के शहीदों की शहादत को कैसे भूला सकते हैं।
               कॉनफैडरएसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री जी उन सीआरपीएफ शहीदों के लिए भी नई योजनाओं का ऐलान करें जो आए दिन देश की आन बान शान के लिए जान कुर्बान करते रहते हैं। यही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। महासचिव ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 8 सालों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के भलाई संबंधित मुद्दों को पूरी तरह से केंद्रीय सरकार द्वारा इग्नोर किया जाता रहा है जिसका ताजा उदाहरण सीआरपीएफ हैडक्वार्टर से दिनांक 29 मार्च 2022 को मिले जवाब को देख कर देशवासी अवशय हैरान होंगे जो कि पैरामिलिट्री फ्लैग डे कोष के गठन को लेकर है। इस संबंध में माननीय केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया लेकिन इसका जवाब सीआरपीएफ के कमांडेंट वेलफेयर दे रहे हैं। इसे लीपापोती ही कहेंगे। हम सरकार से क्या मांग रहे हैं एक अर्ध सेना झंडा दिवस कोष की स्थापना ताकि हमारी विधवाओं विरांगनाओं एवं सेवानिवृत्त परिवारों के कल्याण, पुनर्वास, शहीद परिवारों की जवान बेटियों की शादी व बुढे मां बाप के इलाज में उपरोक्त कोष से मिलने वाली राशि सहायक सिद्ध होगी। आम भारतीय उपरोक्त कोष में स्वेच्छा से दान देंगे। इसमें तो कोई बजट की जरूरत नहीं बल्कि इच्छा शक्ति की साफ कमी झलकती है। केंद्रीय गृह सचिव, माननीय गृह मंत्री जी, रक्षा मंत्री जी, गृह राज्यमंत्री से लेकर महामहिम राष्ट्रपति जी तक गुहार लगाई गई कोई सुनने वाला नहीं है। आए दिन जवान आपसी शूटआऊट एवं आत्महत्याएं कर रहे हैं लगता है गृह मंत्रालय कुंभकरणी नींद सो रहा है।
                   महासचिव रणबीर सिंह ने उम्मीद जताई कि लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी पैरामिलिट्री जवानों व उनके परिवारजनों के कल्याण हेतू लालकिले से 100 दिनों की छुट्टी, सीपीसी कैंटीन पर जीएसटी छूट, राज्यों में अर्धसेनिक कल्याण बोर्ड के गठन व पुरानी पैंशन बहाली की ऐतिहासिक घोषणा करेंगें। हम उन अर्धसेनिक बलों के सरहदी चौकीदारों की बात कर रहे हैं जिनके बीच में आए साल माननीय प्रधान सेवक दिवाली मनाते हैं।

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