सामाजिक समरसता पर आरजेएस का विशेष आयोजन-सत्य

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-अहिंसा और करुणा का दिया संदेश -नई दिल्ली में हुआ भव्य कार्यक्रम

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   राजधानी दिल्ली में सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। 26 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “सत्य, शक्ति, अहिंसा और करुणा के माध्यम से सामाजिक समरसता” रहा। यह आयोजन रामनवमी, सम्राट अशोक जयंती और दुर्गाष्टमी जैसे पावन अवसरों के साथ जोड़ा गया, जिसमें कन्या पूजन भी किया गया।

अमृतकाल में संस्कार और शुद्धता पर जोर
कार्यक्रम के सह-आयोजक लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि देश के अमृतकाल का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक संस्कारित और संतुलित समाज का निर्माण है। उन्होंने कन्या पूजन को समाज में बेटियों के सम्मान और भविष्य में निवेश के रूप में बताया। साथ ही उन्होंने उत्पादन में गुणवत्ता और सामाजिक जीवन में नैतिकता को समान महत्व देने की बात कही।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समाज को दिशा
मुख्य अतिथि आचार्य स्वामी माधवानंद ने भगवान राम को सत्य, चेतना और आनंद का प्रतीक बताते हुए कहा कि आज का समाज अहंकार और असंतुलन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विनम्रता और आत्मचिंतन के बिना व्यक्ति और समाज दोनों आगे नहीं बढ़ सकते। वहीं ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रतिनिधियों ने आधुनिक जीवन की चुनौतियों को आत्मिक शक्ति से जोड़ते हुए कहा कि ध्यान और योग के माध्यम से ही मानसिक शांति और संतुलन संभव है।

सम्राट अशोक के उदाहरण से मिला संदेश
कार्यक्रम में डॉ. एस.पी. सिंह ने सम्राट अशोक के जीवन को उदाहरण बनाते हुए बताया कि कैसे उन्होंने हिंसा से अहिंसा की ओर यात्रा कर समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि अशोक के शिलालेख केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि स्थायी संचार माध्यम थे, जो आज भी नैतिकता और न्याय का संदेश देते हैं।

आगामी कार्यक्रमों की भी रूपरेखा तैयार
इस आयोजन के दौरान विश्व रंगमंच दिवस, सकारात्मक संवाद और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपने विचार साझा किए और समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में योगदान दिया।

सकारात्मक सोच और आत्म परिवर्तन का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि सामाजिक समरसता केवल नारों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत परिवर्तन, नैतिक आचरण और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। आरजेएस द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य 2047 के विकसित भारत के लिए एक मजबूत नैतिक और बौद्धिक आधार तैयार करना है।

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