अमरावती में विशाल किन्नर-संत सम्मेलन, गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की उठी मांग

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September 8, 2026

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-धार्मिक मंच से उठी एकजुट आवाज

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   राजधानी दिल्ली की पावन धरती पर आयोजित भव्य हिंदू किन्नर एवं संत सम्मेलन में आस्था, संस्कृति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस विशाल आयोजन में किन्नर समाज और संत समाज ने एक स्वर में गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को बुलंद किया। सम्मेलन में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं, संतों और समाज के विभिन्न वर्गों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्र की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताया।

सनातन संस्कृति का प्रतीक बनी गौ माता
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि गौ सेवा और संरक्षण केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि यह सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश में गौ माता को सम्मान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ा सकें।

जनजागरण को मिलेगा नया विस्तार
किन्नर और संत समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक यह जनजागरण अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस मुहिम में शामिल होने की अपील की और इसे एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि गौ संरक्षण के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता भी जरूरी है। लोगों को गौ माता के महत्व, उनकी उपयोगिता और संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है। इस दिशा में विभिन्न संगठनों और धार्मिक संस्थाओं को मिलकर कार्य करने की जरूरत बताई गई।

आस्था से राष्ट्र निर्माण का संदेश
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि गौ माता के सम्मान और संरक्षण के माध्यम से ही समाज में नैतिकता, करुणा और एकता को मजबूत किया जा सकता है। यह आंदोलन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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