वरिष्ठों का ये कैसा सम्मान, 95 साल की वार विडो को 900 किलोमीटर जाकर बतानी पड़ रही अपनी पहचान

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वरिष्ठों का ये कैसा सम्मान, 95 साल की वार विडो को 900 किलोमीटर जाकर बतानी पड़ रही अपनी पहचान

-बिलासपुर में 95 साल की वृद्धा हर तीसरे माह पेंशन लेने के लिए जाती है बिलासपुर से बलिया -सरकार को चाहिए अधिकारी उनके घर जाकर करे तस्दीक, तभी होगा वरिष्ठों का असली सम्मान

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/बिलासपुर/शिव कुमार यादव/- बुजुर्गों को सम्मान देने के लिए केंद्र व राज्य सरकारे बड़े-बड़े वादे करती तो नजर आती है लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिछले 20 साल से बिलासपुर की रहने वाली शहीद सैनिक की 95 साल की विधवा को सरकार की बेरूखी के चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उसे हर तीसरे महीने अपनी पेशंन के 6 हजार रूपये लेने के लिए बिलासपुर से बलिया का 900 किलोमीटर का सफर सिर्फ यह बताने के लिए करना पड़ता है कि वह जिंदा है। हम बुजुर्गों के सम्मान का ढोल तो पीटते है लेकिन फिर भी किसी भी अधिकारी या ग्रामीणों ने आज तक आगे बढ़कर बुजुर्ग ललीता की कोई मदद नही की। अधिकारियों को भी बुजुर्ग को यूं सफर कराना शायद काफी अच्छा लग रहा होगा। लेकिन सरकार को चाहिए की ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाये और वृद्धा के घर जाकर उसकी तस्दीक करने की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी चाहिए तभी बुजुर्गो का सम्मान होगा।
                ललिता देवी सेकंड वर्ल्ड वॉर के सैनिक रहे रंजीत सिंह की पत्नी हैं। वैसे तो वो बलिया में ही थीं, लेकिन पिछले दो दशक से बिलासपुर में हैं। बिलासपुर आने के बाद उन्हें हर तीसरे महीने जीवित होने का सबूत देने बलिया जाना पड़ रहा है। पहले उन्हें बेटे के साथ बलिया आने-जाने में ज्यादा दिक्कत नहीं थी, लेकिन पिछले 10 साल से सफर करने की हालत में नहीं हैं। बेटे की आंख की भी 70 फीसदी रोशनी जा चुकी है। इस वजह से वे पिछले कई साल से बिलासपुर के अफसरों को अर्जी देकर पेंशन बलिया से बिलासपुर शिफ्ट करवाना चाह रही हैं, लेकिन सुनवाई ही नहीं हो पाई है।
               ललिता देवी के पति तो वतन के लिए लड़े ही थे, उनके ससुर भी उत्तर प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानी रह चुके हैं, इसलिए उन्हें यह मलाल भी है कि पति और ससुर, दोनों ने देश के लिए जीवन दिया पर बिहार और छत्तीसगढ़, दोनों ही राज्यों के अधिकारी उनकी अर्जी पर ध्यान नहीं दे रहे। दो साल पहले उन्होंने बिलासपुर सैनिक कल्याण बोर्ड को आवेदन दिया कि उन्हें बलिया की जगह बिलासपुर से पेंशन मिल जाए। इसके बाद भी वहां से राहत नहीं मिल पाई।
              ललिता देवी के पति रंजीत सिंह राजपूत रेजिमेंट के सैनिक थे। वे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में महलीपुर थाना इलाके के निवासी थे। रंजीत सिंह 1942 से 1945 तक दूसरे विश्व युद्ध की लड़ाई में रहे और सेना से रिटायर हुए। उनकी मृत्यु 2003 में हुई।
               ललिता देवी की बेटे आरके सिंह की उम्र भी 67 साल हो गई है। वे कृषि विभाग के रिटायर्ड अधिकारी हैं। आंखों से कम दिखाई देता है। घर में भी ऐसा कोई शख्स नहीं जो बलिया में ललिता देवी को रखकर दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर पेंशन बिलासपुर ट्रांसफर करवा सके। समस्या जानने के बाद यहां के अधिकारी मदद नहीं कर रहे हैं।
                बिलासपुर में सैनिक कल्याण बोर्ड के जिला अधिकारी कुलदीप सेंगर का कहना है कि ऐसे मामलों में पेंशनभोगी का रजिस्ट्रेशन जिस राज्य में है, वहां की छव्ब् जरूरी है। दस्तावेज बलिया से ट्रांसफर होकर आए तो यहां से उनकी पेंशन शुरू करवा सकते हैं। नियम है कि हर 3 माह में पेंशनभोगी का फिजिकल वैरिफिकेशन जरूरी है। इसलिए उन्हें जाना पड़ रहा है, तब पैसे मिलते हैं।

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