वन महोत्सव के समापन पर स्व० कृष्ण लाल अरोड़ा की स्मृति में आरजेएस पीबीएच का 599 वां कार्यक्रम संपन्न

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वन महोत्सव के समापन पर स्व० कृष्ण लाल अरोड़ा की स्मृति में आरजेएस पीबीएच का 599 वां कार्यक्रम संपन्न

-आरजेएस पीबीएच ने कॉर्पोरेट पर्यावरण जवाबदेही और युवा एकीकरण के तत्काल आह्वान के साथ किया राष्ट्रीय वन महोत्सव का समापन

नई दिल्ली/- राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने वन महोत्सव के सूत्रधार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी को श्रद्धांजलि दी तथा आठ जुलाई को सप्ताह भर राष्ट्रीय वन महोत्सव विडियो संदेश जागरूकता अभियान का समापन 599 वें वेबिनार से किया।
             

वन महोत्सव के समापन अवसर पर नई दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर के एक प्रसिद्ध प्रकृति प्रेमी, स्वर्गीय श्री कृष्ण लाल अरोड़ा की स्मृति में उनके परिजनों द्वारा पूज्य पिताजी के सकारात्मक मूल्यों व संस्कारों के वारिस के विषय पर सह-आयोजित किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए नीति अरोड़ा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत पारिवारिक विरासत और अंतर-पीढ़ीगत मूल्यों से होती है। मेरे पितातुल्य ससुर जी, परिवार, प्रकृति व संस्कारों के वटवृक्ष थे।
             

अतिथि वक्ता प्रकृति भक्त फाउंडेशन के संस्थापक राजेश शर्मा ने नीति निर्माताओं से आग्रह किया गया कि वे कारखाने के मालिकों और भारी प्रदूषण फैलाने वालों के लिए अपने औद्योगिक पदचिह्न की भरपाई के लिए अनिवार्य वनीकरण हेतु विशिष्ट भूमि बैंक आवंटित करना अनिवार्य करें। उन्होंने तर्क दिया कि मानव अस्तित्व पूरी तरह से बुनियादी ढांचे पर निर्भर नहीं हो सकता है, और चेतावनी दी कि ष्प्रकृति के धर्मष् की अनदेखी करना मानवता की सबसे बड़ी त्रासदी है।
             

विशिष्ट अतिथि शांतिकुंज में अखिल विश्व गायत्री परिवार के क्षेत्रीय समन्वयक स्वामी परमानंद द्विवेदी ने डिजिटल उपवास की अवधारणा पेश की, जिसमें परिवारों से प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से सुबह के समय के आसपास सख्त सीमाएं लागू करने का आग्रह किया गया। उन्होंने आचार्य श्रीराम शर्मा के बताए मार्ग पर चलने का आग्रह किया।
             

नीति अरोड़ा ने पैनल से सवाल किया कि कैसे तकनीक के प्रति जुनूनी युवा जनसांख्यिकीय को आध्यात्मिकता और पर्यावरण चेतना के साथ प्रभावी ढंग से कैसे जोड़ा जाए ? स्वामी परमानंद द्विवेदी ने उत्तर दिया कि इसका भार परिवार इकाई पर भारी पड़ता है, जिसने अपने मूलभूत कर्तव्यों को सोशल मीडिया पर आउटसोर्स कर दिया है। उन्होंने अनिवार्य साप्ताहिक पारिवारिक समारोहों की बहाली की वकालत की जहां खुले संवाद को प्रोत्साहित किया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि युवा अलग-थलग महसूस न करें। मुख्य अतिथि राजयोग मेडिटेशन सेंटर ईस्ट पटेल नगर की बीके राजश्री बहन की ओर से प्रतिनिधि बीके रैनो बहन ने कहा कि युवाओं को व्याख्यान के माध्यम से नहीं सुधारा जा सकता हैय उन्हें जीवित उदाहरणों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दूसरों की आलोचना करने की आधुनिक लत मादक द्रव्यों के सेवन जितनी ही जहरीली है, और माता-पिता को सकारात्मक व्यवहार का मॉडल बनाना चाहिए यदि वे अपने बच्चों से इसे अपनाने की उम्मीद करते हैं।
             

भारत मंडपम की पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक स्वीटी पॉल ने पूछा कि तेज रफ्तार शहरी जीवन के बीच परिवार दैनिक आध्यात्मिक प्रथाओं को कैसे पुनर्जीवित कर सकते हैं, तो द्विवेदी ने ष्नैनो यज्ञष् या दीप यज्ञ की सिफारिश की। उन्होंने समझाया कि पारंपरिक, समय लेने वाले अनुष्ठानों को संक्षिप्त, सार्थक प्रथाओं में संघनित किया जा सकता है, जैसे कि दीपक जलाना और सकारात्मक को अपनाते हुए एक नकारात्मक विशेषता को छोड़ने का दैनिक संकल्प लेना।नोएडा के लिए आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच प्रभारी उदय शंकर सिंह कुशवाहा कहा कि आजादी पर्व का शिखर सम्मेलन 7 अगस्त को सेक्टर 62, नोएडा में दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन इंस्टीट्यूट में एक प्रमुख ऑन-ग्राउंड कार्यक्रम में समाप्त होगा जिसमें आरजेएस पॉजिटिव मीडिया पुस्तक के सातवें संस्करण का विमोचन किया जाएगा।
             

अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सह-आयोजक नीति अरोड़ा ने कहा कि आरजेएस पीबीएच मंच के माध्यम से जन-जन तक सकारात्मक कार्यों को पहुंचाना सभी के सहयोग से संभव है और हम साथ थे, हैं और रहेंगे। संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कहा कि जुलाई -अगस्त में वृक्षारोपण की फोटो 25 जुलाई तक भेजने पर मंथली न्यूजलेटर में प्रकाशित किया जा सकता है। 24 जुलाई को आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया दिवस मनाया जाएगा।

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