लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाना गलत, गलत राह पर जाएंगी युवतियां

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 27, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाना गलत, गलत राह पर जाएंगी युवतियां

-मुस्लिम संगठन जमात- उलेमा-ए-हिंद ने कहा वे इसे नही मानेंगे, सरकार का फैसला पूरी तरह से गलत

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/लखनऊ/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- केंद्र सरकार लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ा कर 21 साल करने के लिए कानून लाने जा रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को लड़कियों के लिए विवाह की कानूनी उम्र 18 से 21 वर्ष तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शादी की उम्र 21 साल करने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन करना होगा। कैबिनेट से प्रस्ताव पास होने के साथ ही इस प्रस्ताव का विरोध होने लगा है जबकि इसका विधेयक संसद में आना बाकी है। लेकिन मुस्लिम संगठन जमात- उलेमा-ए-हिंद के सचिव गुलजार अजमी ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि वे इसे नहीं मानेंगे। सरकार का यह फैसला पूरी तरह से गलत है। जब बालिग की उम्र 18 से तो शादी की 21 वर्ष कैसे हो सकती है। अगर लड़का-लड़की दोनों बालिग हैं। मतलब लड़की 18 साल की है तो बालिग है। शादी की उम्र बढ़ाये जाने पर ऐतराज जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि इससे लड़कियां गलत राह पर चल जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारे मजहब में लड़का-लड़की 14-15 साल में ही बालिग हो जाते हैं, हम लड़कियों के शादी की उम्र 18 से 21 वर्ष किये जाने को नहीं मानेगें।
             इस्लामिक स्कॉलर खान मोहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लाम में प्यूबर्टी के बाद शादी की इजाजत है। सरकार लड़कियों के शादी की न्यूनतम उम्र को बढ़ा कर 21 वर्ष करने के जो कानून लाना चाहती है वो सिर्फ इस्लाम की बात नहीं है। हर धर्म के लोगों को देख कर कानून लाना चाहिए। सरकार को देखना चाहिए कि लड़की का ड्रॉप आउट रेट क्या है, कितना एम्प्लॉयमेंट है। उसके बाद सरकार कानून लाती है तो किसी को विरोध नहीं करना चाहिए।
         ऐसा नही है कि सभी मुस्लिम संगठन इस बिल का विरोध कर रहे है। अयोध्या में बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि सब अपने अपने घरों में चाहते हैं कि जल्द से जल्द शादी-विवाह करके निपट लें। लेकिन बच्चियों की भलाई के लिए सरकार अब जो कर रही है ठीक ही कर रही है। पहले से समाज मे एक परंपरा बनी हुई है। अब सरकार ने कुछ सोचा होगा, इसलिए कर रही होगी।
               महंत हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि सनातन धर्म को आगे बढ़ाने के लिए मोदी सरकार सब कुछ कर रही है। केवल सनातन धर्म ही नहीं मुस्लिम धर्म की कुरीतियों को भी मोदी सरकार हटा रही है, जैसे तीन तलाक, बाल विवाह। बहुत लोग कम उम्र में बच्चों का विवाह कर देते थे। इन सब पर रोक के लिए 21 साल करना ठीक है।
               ज्ञात हो कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 में एक संशोधन पेश करेगी और इसके परिणामस्वरूप विशेष विवाह अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 जैसे व्यक्तिगत कानूनों में संशोधन लाएगी। बुधवार को दी गई मंजूरी दिसंबर 2020 में जया जेटली की अध्यक्षता वाली केंद्र की टास्क फोर्स द्वारा नीति आयोग को सौंपी गई सिफारिशों पर आधारित हैं। इसका गठन ‘मातृत्व की उम्र से संबंधित मामलों, मातृ मृत्यु दर को कम करने की आवश्यकता, पोषण में सुधार से संबंधित मामलों की जांच के लिए किया गया था।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox