रूस पर पांबदी से भारत के रक्षात्मक सौदों पर पड़ेगा गहरा असर, पाकिस्तान-चीन खुश

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रूस पर पांबदी से भारत के रक्षात्मक सौदों पर पड़ेगा गहरा असर, पाकिस्तान-चीन खुश

-रणनीतिकारों का मानना रूस से भारत को टैंक-पनडुब्बी व एस-400 की खेप मिलना हो जायेगा मुश्किल
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/-
रूस-यूक्रेन युद्ध में भले ही पूरा विश्व शांति की बात कर रहा हो लेकिन दूसरी तरफ यूरोप व अमेरिका द्वारा रूस पर लगाई गई पाबंधियों का आकलन भी अब शुरू हो गया है। हालांकि इन पाबंधियों का असर भारत पर सबसे ज्यादा पड़ता दिखाई दे रहा है क्योंकि भारत रूस का सबसे बड़ा रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश है। रूस पर पाबंदी से भारत को टी-90 टैंक और चक्र-3 परमाणु पनडुब्बी से लेकर एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने में मुश्किले आ सकती है। देखा जाए तो इससे सबसे ज्यादा खुशी चीन और पाकिस्तान को होगी, क्योंकि एलएससी पर तनाव के चलते चीन नहीं चाहेगा कि भारत को ये हथियार जल्द मिलें। अब रूस को आगे की रणनीति तय करनी होगी। हालांकि रूस ने कहा कि भारत के रक्षा सौदों को रूस पूरा करेगा।
              ऐसे में आइए जानते हैं कि रूस पर लगी पाबंदियों का असर कैसे भारत को मिलने वाले हथियारों पर पड़ेगा। भारत और रूस के पास इन प्रतिबंधों से बचने का क्या रास्ता है?
            भारत का रक्षा के क्षेत्र में रूस के साथ पुराना सहयोग रहा है, लेकिन कोई नया पेमेंट मैकेनिज्म नहीं होने के चलते रूस पर नए प्रतिबंधों का असर भारत के रक्षा आयात पर पड़ सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा तनाव का असर रूस से होने वाली हथियारों की डिलीवरी पर तत्काल पड़ने की संभावना है, क्योंकि रूसी बैंकिंग चैनलों पर बैन से भारत के पेमेंट्स सिस्टम को प्रभावित करेगी। इससे पेमेंट्स में देरी हो सकती है। किसी भी हथियार की खरीद के लिए किसी देश को एक साथ पूरा पैसा नहीं दिया जाता है। जैसे जैसे हथियार की डिलीवरी होती रहती है वैसे ही उसका पेमेंट्स किया जाता है। इससे कई ऐसी रक्षा डील पर भी असर पड़ेगा जो हो चुकी हैं। रूसी बैंकिंग सिस्टम के खिलाफ नए प्रतिबंध और इन्हें स्विफ्ट से बाहर करने के कदम से दोनों देशों के बीच सामान्य रूप से कारोबार करने की क्षमता पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।

-एस-400 एयर डिफेंस सिस्टमः
भारत ने 2018 में रूस से पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए 5.4 अरब डॉलर की डील की थी। इनमें से सिर्फ एक यूनिट कुछ महीने पहले ही भारत को डिलीवरी हुई है। इसकी तैनाती भी हो गई है, लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगने से बाकी चार यूनिट के जल्द मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है। अमेरिका भी इस डील से नाराज है। ऐसे में वह काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट, यानी सीएएटीएसए के तहत भारत पर कार्रवाई कर सकता है। अमेरिका एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदने पर तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है। सीएएटीएसए के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास ईरान, नॉर्थ कोरिया या रूस के साथ महत्वपूर्ण लेन-देन करने वाले देश के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।
             चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव की स्थिति में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि चीन के पास पहले से ही 6 एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इनमें से दो की तैनाती उसने एलएसी के पास कर रखी है।
             अमेरिका के पास पैट्रियट मिसाइल सिस्टम है। इसे बेहद ताकतवर माना जाता है, लेकिन कई पैमानों पर एस-400 उससे भी बेहतर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पैट्रियट सिस्टम की तैनाती में 25 मिनट का समय लगता है वहीं, एस-400 को 6 मिनट के भीतर तैनात किया जा सकता है। इसलिए भारत के पास एकमात्र विकल्प एस-400 है।

-एके-203 राइफलः-
भारत और रूस ने अमेठी की कोरवा डिफेंस फैक्ट्री में 5 लाख एके-203 राइफल बनाने की डील भी साइन की है। अभी तक अमेठी में उत्पादन शुरू नहीं हुआ है। इसलिए इसमें भी देरी होगी। भारतीय सेना को मिलने वाली राइफलों में से 70 हजार राइफलों के पार्ट रूस में निर्मित होंगे। इन राइफलों का उत्पादन शुरू होने के करीब ढाई सालों बाद ये सेना को मिलना था।

-चक्र-3 परमाणु पनडुब्बीः-
भारत ने रूस से 10 साल की लीज पर अकुला क्लास की परमाणु पनडुब्बी को लेने की डील की है। इसे भारत में चक्र-3 के नाम से जाना जाता है। रूस इंडियन नेवी को इसे 2025 में सौंपेगा। अब रूस पर प्रतिबंध लगने से इस पनडुब्बी के मिलने में देरी हो सकती है।

-तलवार क्लास का फ्रिगेटः-
2018 में इंडियन नेवी के लिए चार तलवार क्लास के एडवांस फ्रिगेट के युद्धपोतों की डिलीवरी के लिए 950 मिलियन डॉलर की डील हुई थी। इन युद्धपोत को एक यूक्रेनी गैस टर्बाइन इंजन लगना है। भारत को 2019 में क्रीमिया संकट के बावजूद यूक्रेन को रूस में बनने वाले पहले दो युद्धपोतों के लिए इंजन की आपूर्ति करने के लिए मनाने में कामयाब रहा। इन दो युद्धपोतों के लिए गैस टर्बाइन इंजन रूस को डिलीवर कर दिए गए हैं। हालांकि, पाबंदी के चलते इनमें भी देरी हो सकती है।

मिग-29
भारत की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 2020 में रूस से 21 मिग-29 जेट के अधिग्रहण को मंजूरी दी थी। प्रतिबंध लगने के बाद इस बार संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका के एक शीर्ष अफसर ने भी दावा किया है कि भारत ने रूस से यह डील रद्द कर दी है। इसके साथ ही इंडियन एयरफोर्स के पास जो सुखोई-30 और मिग फाइटर जेट हैं वह भी रूस के बने हैं। एयरफोर्स के कुल प्लेन में से 71 फीसदी हिस्सा इन्ही का है। ऐसे में इनके रखरखाव के लिए कलपुर्जों और उपकरण रूस से ही मिलते हैं। प्रतिबंधों का असर इन पर भी पड़ेगा।

टी-90 टैंक
भारत के पास अभी रूस के बने 1500 से ज्यादा टी-90 टैंक हैं। वहीं भारत ने रूस से 2019 में 464 और टी-90 टैंक खरीदने की डील की थी।
यूक्रेन पर रूसी हमले का असर इस डील पर भी पड़ सकता है। कई रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि भारत ने यह डील रद्द कर दी है।

ब्रह्मोस मिसाइलें
रूस पर प्रतिबंध का असर भारत में बने सभी रूसी रक्षा उत्पाद जैसे पैदल सेना लड़ाकू वाहन बीएमपी-2 और ब्रह्मोस मिसाइलों पर भी पड़ेगा, क्योंकि इनके रखरखाव और मरम्मत के लिए उपकरण रूस से ही आते हैं। भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल को बनाया है। इसके साथ ही भारत को फिलीपींस से इसके निर्यात का ऑर्डर मिला है। प्रतिबंधों का असर इस पर भी पड़ेगा, क्योंकि रूस से इसके कलपुर्जे और उपकरण मिलने में देरी होगी।
                 देखा जाए तो 2014 से ही रूस पर वित्तीय प्रतिबंध लगा हुआ है। इस दौरान भारत और रूस अपने व्यापार के कुछ हिस्से के लिए अमेरिकी डॉलर को बायपास करने के तरीके खोजने में कामयाब रहे हैं। इसके अलावा भारत-रूस व्यापार का एक हिस्सा भारतीय रुपये में भी होता है न कि अमेरिकी डॉलर में। इसके अलावा भी भारत के पास रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए कुछ विकल्प हैं। दोनों देश व्यापार के लिए अपनी-अपनी करेंसी का उपयोग कर सकते हैं।
                2014 में प्रतिबंधों के बाद से रूस ने स्विफ्ट का अपना विकल्प विकसित कर लिया है। इसे सिस्टम फॉर ट्रांसफर ऑफ फाइनेंशियल मैसेज यानी एसपीएफएस कहा जाता है। कुछ भारतीय बैंक वित्तीय लेनदेन करने के लिए इस नेटवर्क पर रजिस्टर करा सकते हैं। साथ ही भारत के पास नई डिजिटल करेंसी का यूज करने का भी विकल्प होगा जो आरबीआई लाने जा रही है।
       वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि ये ऑल्टरनेटिव मैकेनिज्म रूस के छोटे बैंक हो सकते हैं। इन पर प्रतिबंध नहीं लगे हैं। इनके जरिए भारत आसानी से रूस को पेमेंट कर सकेगा। अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों ने कुछ रूसी बैंकों को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर कर दिया है। अभी तक स्विफ्ट का असर सिर्फ बड़े बैंकों पर ही है।

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