राजस्थान में बड़ें फैसलें की तैयारी में कांग्रेस आलाकमान, गहलोत के बाद अब सचिन से मुलाकात

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राजस्थान में बड़ें फैसलें की तैयारी में कांग्रेस आलाकमान, गहलोत के बाद अब सचिन से मुलाकात

-कांग्रेस को सता रहा पंजाब का हर्ष, राजस्थान में पार्टी नेताओं की खींचतान पर कांग्रेस सतर्क
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- पंजाब में अपने हर्ष को देखकर अब 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। कांग्रेस को डर है कि कहीं पार्टी की फूट व नेताओं की आपसी खींचतान राजस्थान में कांग्रेस का हर्ष पंजाब जैसा न कर दे जिसे लेकर पार्टी आलाकमान काफी सतर्क हो गया है और राजस्थान पर फोकस बढ़ाते हुए कांग्रेस आलाकमान अब राजस्थान कांग्रेस के नेताओं से बातचीत कर रहा है। इसी कड़ी में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बीते दो दिनों में राज्य के दो प्रमुख नेताओं से मुलाकात की और सरकार-संगठन को लेकर चर्चा की। बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया से मुलाकात की थी। वीरवार को सचिन पायलट मिले। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कुछ बड़ा फैसला करने वाला है।
                    राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव है। लेकिन बीते कई महीने से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच खटपट चल रही है। पंजाब की तरह ही बड़े नेताओं की यह खटपट कहीं राजस्थान चुनाव पर भी भारी न पड़े, इसके पहले शीर्ष नेतृत्व कोई अहम फैसला करने की तैयारी में है। इसी सिलसिले में बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और फिर वीरवार को सचिन पायलट से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि पायलट ने मुख्यमंत्री बनने की स्पष्ट इच्छा जताई है। लेकिन मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बातचीत में पायलट ने कहा कि पार्टी नेतृत्व उन्हें जो भी दायित्व देगा, वह उसका निर्वहन करेंगे, वह सिर्फ यही चाहते हैं कि राजस्थान में हर पांच साल पर सरकार बदलने की दशकों पुरानी परंपरा इस बार टूटे और कांग्रेस दोबारा सत्ता में आए।
               वहीं, पार्टी सूत्रों का कहना है कि सचिन के लिए सोनिया गांधी कई विकल्पों पर विचार कर रही हैं। संभव है कि पार्टी के इस युवा चेहरे को राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाए। फिलहाल फैसला आने वाले चुनाव के मद्देनजर लिया जाना है। सचिन पायलट का उपयोग पार्टी ने हाल के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कर चुकी है। युवाओं के बीच उनका सहजता से घुलमिल जाना काफी अपीलिंग रहा। उनकी इस खूबी का पार्टी बाकी राज्यों के चुनावों में उपयोग करने को उत्सुक है। लेकिन मुश्किल यह है कि क्या पायलट इसके लिए तैयार हैं? पायलट के पूर्व के बयान बताते हैं कि वे राजस्थान छोड़ना नहीं चाहते।
                  पायलट राहुल गांधी के करीबी कही जाने वाली उस कोटरी के सदस्य हैं, जिसमें कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह हुआ करते थे। सिंधिया, जितिन और आरपीएन कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। गहलोत से चल रही खटपट के चलते अक्सर सचिन पायलट के भी भाजपा में जाने की चर्चाएं उड़ती रहती हैं। दो साल पहले अपने समर्थक 18 विधायकों के साथ पायलट बगावती रुख दिखा भी चुके हैं। कई दिनों तक अज्ञातवास पर रहे थे। गहलोत की सरकार को बचाने के लिए प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने दखल दिया और किसी तरह पायलट को मनाया। लेकिन जिन मुद्दों को पायलट ने शीर्ष नेतृत्व के सामने रखा था, उस पर पूरी तरह अमल नहीं किया गया। इस मसले पर पायलट ने कुछ दिनों पहले राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से भी मुलाकात की थी।

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