रंगभरनी एकादशी पर बांके बिहारी के दर्शन करने पंहुचें लाखो श्रद्धालु

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 26, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

रंगभरनी एकादशी पर बांके बिहारी के दर्शन करने पंहुचें लाखो श्रद्धालु

-रंगभरनी एकादशी के साथ शुरू हुई ब्रज की होली, बांके बिहारी मंदिर में हुआ रंगोत्सव का शुभारंभ

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/उत्तरप्रदेश /शिव कुमार यादव/- पूरे देश में होली का त्यौहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन ब्रज में होली का त्यौहार केवल एक दिन का नही होता है। कहने को तो 8 मार्च को होली का त्यौहार है लेकिन ब्रज में रंगभरनी एकादशी के तहत ही ब्रज की होली का महा उत्सव शुरू हो जाता है। इस बार रंग भरनी एकादशी के इस पावन अवसर पर पूरे देश से करीब 5 लाख लोग बांके बिहारी के दर्शन के लिए वृंदावन पंहुचें है।
                    पुलिस और सुरक्षाकर्मियों द्वारा भीड़ को सम्भाल पाना बहुत मुश्किल हो गया। बताया जा रहा हैं कि 5 लाख से अधिक लोगों की भीड़ ब्रज की होली खेलने सुबह और शाम दोनों समय दिखाई दी। श्रद्धालुओ की ऐसी भीड़ देख मंदिर के पुजारी गोस्वामी द्वारा सुबह 8ः45 पे ही ठाकुर जी के पट खोल दिए गए थे। पट खुलते ठाकुर जी के नाम के जयकारे लगना शुरू हो गए। श्रद्धालुओ की भीड़ ऐसी की पैर रखने की जगह नहीं थी।     सभी भक्त ठाकुर जी की एक झलक पाने के लिए आतुर नजर आ रहे थे। सभी बांके बिहारी के रंग में रंगे हुए थे। हालाकि इतनी भयंकर भीड़ के बावजूद किसी भी व्यक्ती को कोई हानि नहीं पहुंची।

बांके बिहारी के रंगे में रंगे ब्रजवासी, खेली फूलों की होली
ब्रज की इस रंग भरनी एकादशी मे माहौल ऐसा छाया की मानो स्वयं ठाकुर भक्तों के साथ होली खेलने उतरे हो। टेसू के फ़ूलों और केसर वाले रंगों को सभी भक्त जनों पर डाला गया। मंदिर का पूरा प्रांगण फूलों और रंगों से ढक चुका था। चंदन, चोवा और रंग बिरंगे गुलाल के साथ ब्रजवासियों और श्रद्धालुओ ने ब्रज की होली का आनंद लिया।

बांके बिहारी ने श्वेत पोशाक धारण कर, दिए दर्शन
वृंदावन की इस रंग भरनी एकादशी के अवसर पर ठाकुर जी को श्वेत वस्त्र पहनाए गए। ठाकुर जी पर स्वर्ण पिचकारी के साथ सुगंधित केसर वाले फ़ूलों की वर्षा की गई। उसके बाद सभी भक्तों के ऊपर रंगे बिरंगे और सुगंधित फूल और गुलाल डालते हुए। होली का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर चारों तरफ बांके बिहारी के जयकारे सुनने मिले। साथ एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। मानो स्वयं बांके बिहारी अपने एक एक भक्त के साथ होली खेल रहे हो।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox