
मानता हूँ,
थोड़ा मुश्किल है,
अंधेरे में भी रास्ते खोजना,
बेरोज़गारी में रोज़गार देखना,
मानता हूँ थोड़ा मुश्किल है।
पर हारना नहीं, टूटना नहीं,
अपनों से रूठना नहीं,
लड़खड़ाओ, तो संभल जाओ,
गिरो, तो फिर उठ जाओ,
पर टूटना नहीं, हारना नहीं,
गुस्से में किसी को मारना नहीं।
मृत्यु तो है ही अंधेरा,
जीवन है जहां, वहाँ सवेरा।
अंधेरे में सवेरा हो जाओ,
मशाल युक्ति की मन में जलाओ,
कि कैसे दुनिया को दूं,
कोई सुविधा,
कोई खुशी,
या कोई शक्ति,
या कर दो कोई कमाल,
जिसे पाकर वो कहे,
‘तुम तो हो बेमिसाल’
खुश होकर ये दुनिया,
देगी तुम्हें धन्यवाद,
एक क़ीमत के रूप में,
एक मुद्रा के रूप में,
जो होगा तुम्हारा रोज़गार
हो सकता है वो बन सके,
औरों का भी रोज़गार।
हो भी सकता है,
तुममें क्षमता न हो,
कुछ नया खोजने की,
कुछ ईजाद करने की,
कोई युक्ति लगाने की,
हो भी सकता है,
तुममें क्षमता न हो।
तो भी न घबराओ,
आंखों पे दूरबीन लगाओ,
और खोजो ऐसा व्यक्ति,
जो लगा रहा हो युक्ति,
उसके साथी बन जाओ,
उसकी ताक़त बन जाओ,
उसको रोटी कमवाओ
साथ में तुम भी कमाओ।
बस यही तो है रोज़गार,
यही है व्यापार,
जो दे सपनों को आकार।
खुद भी जागो,
औरों को भी जगाओ,
अपने परिवार को खुशियां दिलाओ,
और
देश का नाम भी ऊपर उठाओ।
मानता हूँ,
थोड़ा मुश्किल है,
अंधेरे में हाथ पैर मारना,
खाली में भी कुछ को निहारना,
मानता हूँ थोड़ा मुश्किल है,
पर नामुमकिन कुछ नहीं,
कुछ तो मुमकिन है।
हेमन्त रायपुरिया


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