मल्लिकार्जुन को मिला कोर्ट का नोटिस, 27 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

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मल्लिकार्जुन को मिला कोर्ट का नोटिस, 27 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

-राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष को भेजा नोटिस -शिकायत खारिज करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने दिल्ली पुलिस और मल्लिकार्जुन खरगे को जारी किया।

मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ दर्ज शिकायत खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका पर उन्हें नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। कोर्ट ने अगली तारीख से पहले ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड भी तलब किया है।

याचिका अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता की ओर से दायर की गई है, जिसमें तीस हजारी कोर्ट के 11 नवंबर 2025 के आदेश को रद करने की मांग की गई है। इस आदेश में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया था और संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। रिवीजन याचिका में रविंद्र गुप्ता की ओर से अधिवक्ता गगन गांधी ने पैरवी की।
दरअसल, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मल्लिकार्जुन खरगे ने अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर घृणास्पद भाषण दिया था। शिकायतकर्ता रविंद्र गुप्ता, जो आरएसएस के सदस्य बताए गए हैं, ने दावा किया था कि खरगे के बयान से उन्हें और संगठन को ठेस पहुंची है। हालांकि, 11 नवंबर 2025 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रीति राजोरिया ने शिकायत खारिज करते हुए कहा था कि खरगे का बयान किसी विशेष समुदाय, धर्म, जाति या जातीय समूह को लक्षित नहीं करता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बयान राजनीतिक और वैचारिक आलोचना के दायरे में आता है और इससे न तो किसी समुदाय के खिलाफ घृणा भड़कती है और न ही किसी प्रकार की हिंसा के लिए उकसावा मिलता है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि केवल तीखी या कठोर आलोचना को हेट स्पीच नहीं माना जा सकता, जब तक कि उससे दो समूहों के बीच नफरत या सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने की मंशा स्पष्ट न हो। मजिस्ट्रेट ने यह भी माना था कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत मानहानि का अपराध भी नहीं बनाते।

मानहानि के आरोप पर कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में संज्ञान लेना कानूनी रूप से बाधित है, क्योंकि शिकायत स्वयं कथित पीड़ित यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दायर नहीं की गई है। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रवासी भलाई संगठन बनाम भारत संघ’ मामले का भी हवाला दिया गया था, जिसमें कहा गया है कि हेट स्पीच और सार्वजनिक अव्यवस्था के बीच सीधा संबंध होना आवश्यक है।
इससे पहले दिसंबर 2024 में भी कोर्ट ने मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता के पास साक्ष्य उपलब्ध हैं और पुलिस जांच की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि बाद में किसी विवादित तथ्य की जांच की जरूरत पड़ी तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत कदम उठाया जा सकता है।

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