भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से सफल वापसी

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August 24, 2026

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भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से सफल वापसी

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/-  भारत ने एक बार फिर अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफल वापसी कर देश को गौरवान्वित किया है। वह अमेरिका की स्पेसएक्स कंपनी और एक्सिओम स्पेस के AX-4 मिशन का हिस्सा थे।

शुभांशु और उनके तीन साथियों – मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के वैज्ञानिक स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की, और हंगरी के टिबोर कापू – ने 18 दिनों तक अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया। टीम ने 60 से अधिक प्रयोग किए, जिनमें भारत द्वारा भेजे गए 7 प्रमुख वैज्ञानिक प्रयोग भी शामिल थे, जैसे माइक्रो एल्गी, मसल लॉस और प्लांट ग्रोथ संबंधित अध्ययन। स्पेसएक्स का ड्रैगन यान सोमवार शाम 4:45 बजे (IST) आईएसएस से रवाना हुआ और 22.5 घंटे की अंतरिक्ष यात्रा के बाद मंगलवार दोपहर कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक स्प्लेशडाउन कर गया। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मिशन अत्यंत जटिल था और छोटी सी तकनीकी खामी भी बड़ा खतरा बन सकती थी। उन्होंने बताया कि यदि पैराशूट फेल हो जाता, थ्रस्टर्स काम न करते, या वायुमंडलीय प्रवेश के दौरान शील्ड डैमेज होती, तो जान पर बन सकती थी। यही कारण है कि अंतरिक्ष मिशनों में हर तकनीक का बार-बार परीक्षण किया जाता है।ड्रैगन यानी पूरी तरह ऑटोनॉमस है, लेकिन जरूरत पड़ने पर मैनुअली भी ऑपरेट किया जा सकता है। यह अब तक कई सफल मिशनों में प्रयोग किया जा चुका है और इसकी री-यूज़ेबल तकनीक इसे बेहद खास बनाती है।

अंतरिक्ष से लौटने के बाद शुभांशु शुक्ला ने भी अपने ऐतिहासिक अनुभव साझा करते हुए कहा – “भारत आज भी सारे जहां से अच्छा दिखता है।” यह वाक्य राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान की याद दिलाता है और भारत की अंतरिक्ष यात्रा को एक नई ऊंचाई देता है।

यह मिशन भारत के लिए न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हुआ है।

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