बोतलबंद पानी पी रहे है तो हो जाये सावधान, बोतलबंद पानी नही है सुरक्षित

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बोतलबंद पानी पी रहे है तो हो जाये सावधान, बोतलबंद पानी नही है सुरक्षित

-नल के पानी से बोतलबंद पानी 3500 गुना ज्यादा नुकसान देह, शोध में हुआ खुलासा,

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- यदि आप बोतलबंद पानी पी रहे है तो सावधान हो जायें, क्योंकि नल के पानी की तुलना में बोतलबंद पानी ज्यादा नुकसान देह साबित हो सकता है। एक शोध में बताया गया है कि बोतलबंद पानी नल के पानी की अपेक्षा 3500 गुना ज्यादा नुकसान देह है। हालांकि हम नल के पानी की तुलना में बोतलबंद पानी को प्राथमिकता देते है। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि बोतलबंद पानी न केवल सेहत के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरनाक है।
                     गर्मी हो या सर्दी हम हमेशा बोतलबंद पानी को ही तरजीह देते है। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान तो बोतलबंद पानी की खरीद के सारे रिकार्ड ही टूट गये। हम समझते है बोतलबंद पानी पूरी तरह से सुरक्षित है और हमारी सेहत के लिए बिल्कूल फिट है। लेकिन हम यहीं सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं दरअसल बोतल में काफी दिनों तक बंद रहने के कारण पानी के मूल तत्व नष्ट हो जाते है। चाहे कंपनियां इसकी शुद्धता का कितना भी दावा करे लेकिन यह पानी नल के पानी की तुलना में काफी हानिकारक हो जाता है।
                       बार्सिलोना में हुई एक स्टडी के अनुसार बोतलबंद पानी का पारिस्थितिकी तंत्र पर 1400 गुना और जल स्रोतों पर 3500 गुना ज्यादा बुरा प्रभाव डालता है। इन बोतलबंद पानी को बनाने की प्रक्रिया में हर साल करीब 1.43 प्रजातियां धरती से खत्म हो जा रही हैं जो कि जैव-विविधता को खत्म करने की एक बुरी और अनचाही साजिश है। पिछले साल पूरी दुनिया में बोतलबंद पानी की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है। इसकी रिपोर्ट साइंस ऑफ द टोटल एनवायरमेंट जर्नल में प्रकाशित हुई है। वैश्विक स्तर पर बढ़े बोतलबंद पानी की खपत के पीछे प्रमुख कारण है खतरे का आकलन और ऑर्गेनौलेप्टिक्स यानी पानी के स्वाद और गंध को लेकर परसेप्शन, सार्वजनिक नलों के पानी पर भरोसा नहीं करना और बोतलबंद पानी के उद्योग द्वारा किए जा रहे विज्ञापन. इन्हीं वजहों से बोतलबंद पानी की खपत पिछले साल काफी ज्यादा हुई है। एक वजह लॉकडाउन भी था. लोग बोतलबंद पानी खरीदने के लिए मजबूर थे.।  
                     बार्सिलोना में हुई स्टडी में तीन तरह के पानी की कीमत और उनके फायदों का विश्लेषण किया गया. तीन तरह का पानी है- बोतलबंद पानी, नल का पानी और नल का फिल्टर.पानी। स्टडी में ये बात सामने आई कि बोतलबंद पानी की ज्यादा खपत पर्यावरण को नल के पानी से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। स्टडी करने वाली टीम ने बताया कि उन लोगों ने तीनों तरह के पानी की जांच और विश्लेषण हर तरीके से किया है।
बार्सिलोना की आबादी चार तरह का पानी पीती है. पहला – वो जलस्रोत जहां से पीने का पानी प्राकृतिक तौर पर मिलता है, दूसरा- नल का पानी, तीसरा- बोतलबंद पानी और चौथा- नल का फिल्टर पानी। जहां पर लोग नल का पानी ज्यादा पीते हैं, वहां पर पर्यावरणीय नुकसान कम देखे गए. स्रोतों की खपत भी कम हुई है. जबकि, जहां पर लोग बोतलबंद पानी पी रहे थे, वहां पर पर्यावरणीय नुकसान ज्यादा देखे गए. बोतलबंद पानी का प्रजातियों पर 1400 गुना ज्यादा असर होता है, जबकि जलीय स्रोतों पर 3500 गुना ज्यादा। नल के पानी पीने से जो सामान्य दिक्कत देखने को मिली है, वो है ट्राईहैलोमीथेन,. ये उन रसायनों का बाइ-प्रोडक्ट है, जो खेतों में फसलों को .बचाने के लिए छिड़के जाते हैं। ये मिट्टी में मिल जाते हैं, उसके बाद जलीय स्रोतों और फिर नल के पानी में मिल जाते है। अगर इसकी मात्रा बढ़ती है तो ब्लैडर कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है लेकिन जहां पर सार्वजनिक नल के पानी का रखरखाव बेहतर होता है, वहां पर पर्यावरणीय नुकसान भी कम होते हैं।
                        इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता क्रिस्टीना विलानुएवा ने कहा कि बार्सिलोना में नल के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार लाया गया है। यहां के पानी में ट्राईहैल…ट्राईहैलोमीथेन की मात्रा बहुत कम है, इसलिए लोगों की सेहत पर नुकसान भी कम है. हालांकि, बोतलबंद पानी से कई अन्य तरह के नुकसान का जिक्र स्टडी में किया गया है।
                       स्टडी में बताया गया है कि नॉन-रिन्यूएबल रिसोर्स कम हो रहे हैं। प्रदूषण का स्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। दिसकी वजह से पानी में भी इनका मिलना तय होता है। इसकी वजह से जलीय जीवन को नुकसान पहुंचता है। समुद्री और नदियों के पानी में माइक्रो और नैनो-प्लास्टिक की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसकी कई रिपोर्टस अक्सर आती रहती हैं. इसलिए बोतलबंद पानी का उपयोग कम करना होगा. क्योंकि पानी तो आप पी लेते हैं, लेकिन बोतल को प्रदूषण फैलाने के लिए छोड़ देते हैं।

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