प.रामप्रसाद बिस्मिल का बलिदान अनुपम था -अनिल आर्य

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प.रामप्रसाद बिस्मिल का बलिदान अनुपम था -अनिल आर्य

-महान क्रांतिकारी प.रामप्रसाद बिस्मिल को 94 वे बलिदान दिवस पर दी श्रद्धांजलि -नाम बेनाम शहीदों को याद करने की आवश्यकता है-आचार्य चंद्र शेखर शर्मा

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी प.रामप्रसाद बिस्मिल के 94 वे बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह कॅरोना काल में 329 वा वेबिनार था।
      केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि बिस्मिल क्रांतिकारियों के सिरमौर थे,उन्हें मात्र 30 वर्ष की आयु में 19 दिसम्बर 1927 को गौरखपुर की जेल में फाँसी दी गई। वह काकोरी कांड के प्रणेता थे। बिस्मिल क्रांतिकारी के साथ साथ अच्छे लेखक, साहित्यकार व शायर भी थे। सुप्रसिद्ध गीत “सरफरोशी की तमन्ना“ उन्ही की रचना थी। वह आर्य समाज के विद्धवान प.सोमदेव जी से प्रेरणा लेकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। बिस्मिल को फांसी के बाद देश में क्रांतिकारी आंदोलन तेज हो गया और कई नोजवान कूद पड़े और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग जोर पकड़ने लगी। बिस्मिल ने नोजवानो को आह्वान किया था कि कृषकों व मजदूरों को संगठित करने का काम करे। फांसी से तीन दिन पहले उन्होंने अपनी आत्म कथा जेल की काल कोठरी में लिखी थी युवकों को वह अवश्य पढ़नी चाहिए।
               आचार्य चंद्रशेखर शर्मा (ग्वालियर) ने आजादी के अनेको गुमनाम शहीदों का परिचय करवाते हुए कहा कि आज पाठ्यक्रम में इन्हें पढ़वाने की आवश्यकता है, जिससे नई पीढ़ी उनके बलिदान, त्याग, तपस्या को जान सके। 1857 से 1947 तक के आजादी के संघर्ष को नए सिरे से लिखने की आवश्यकता है जो क्रांतिकारी इतिहास के साथ छल किया गया है उसमें सुधार हो सके। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीन आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद का अनेको  क्रांतिकारियों से सम्पर्क था व प्रेरक रहे। अध्यक्ष आर्य नेता गजेन्द्र चौहान ने कहा कि आजादी का इतिहास फिर से लिखा जाना चाहिए केवल शान्ति शान्ति से देश आजाद नहीं हुआ। गायक रविन्द्र गुप्ता, नरेन्द्र आर्य सुमन, दीप्ति सपरा, मर्दुल अग्रवाल, रजनी गर्ग, प्रतिभा कटारिया, रेणु घई, सुमित्रा गुप्ता, नरेशप्रसाद आर्य, सुदेश आर्या, कमलेश चांदना, प्रवीना ठक्कर आदि ने मधुर गीत सुनाये।

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