प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर चल रही किसान ’संसद’, कानून वापस लेने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी

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प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर चल रही किसान ’संसद’, कानून वापस लेने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी

-जंतर-मंतर से लेकर संसद तक किसान आंदोलन की गूंज, समर्थन करे सांसद वरना होगा विरोध- टिकैत

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/जंतर-मंतर/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- संसद में मानसून सत्र के बीच केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान जंतर-मंतर पर गुरुवार को प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसके तहत जंतर-मंतर पर संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आयोजित किसान संसद शुरू हो गई हैं। अपने आंदोलन को धार देने के लिए किसान नेता नये-नये बयान दे रहे है। जिसे देखते हुए अब जंतर-मंतर से संसद तक किसान आंदोलन की गूंज साफ सुनाई दे रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसदों ने भी संसद परिसर मे ंकिसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया। वहीं किसान नेता टिकैत ने कहा कि जो सांसद संसद में किसानों की मांग नही उठायेगा उनका बाहर हर स्तर पर विरोध होगा। हालांकि किसान आंदोलन के दौरान सुरक्षा के सख़्त बंदोबस्त किए गए हैं।
                        दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले 8 महीने से जारी किसानों का आंदोलन आज बॉर्डर से संसद के पास तक पहुंच गया है। आज से किसानों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर अपना आंदोलन शुरू किया है। संसद के मानसून सत्र के दौरान चलने वाले इस आंदोलन में रोज़ाना 200 किसानों को शामिल होने की इजाज़त दी गई है। एक तरफ़ जहां किसान जंतर मंतर पर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं संसद परिसर में विपक्ष ने किसानों के समर्थन में हंगामा किया। संसद के भीतर विपक्ष के सांसदों ने किसानों के समर्थन में हंगामा किया। वहीं संसद परिसर में कांग्रेस के सांसदों ने कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस के .इस प्रदर्शन में राहुल गांधी भी शामिल हुए।
                   प्रदर्शन के दौरान योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान जंतर-मंतर पर सरकार को यह दिखाने के लिए आए हैं कि वे मूर्ख नहीं हैं, ब्रिटेन की संसद हमारे मुद्दों पर बहस कर रही है, लेकिन हमारी सरकार नहीं।
                   जंतर मंतर पर किसान यूनियन के नेता हन्नान मुल्ला ने कहा कि हमने अपनी मांगों को उठाने के लिए सभी सांसदों को पत्र लिखा है, लेकिन संसद में हमारे मुद्दे नहीं उठाए जा रहे हैं।
                     किसान नेता राकेश टिकैत ने जंतर मंतर पर कहा कि आज आठ महीने बाद सरकार ने हमें किसान माना है। किसान खेती करना भी जानता है और संसद चलाना भी जानता है। संसद में किसानों की आवाज दबाई जा रही है। जो सांसद किसानों की आवाज नहीं उठाएगा हम उसका विरोध करेंगे।
                     किसान संसद की शुरूआत में पहले तो आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी गई, उसके बाद किसानों नेताओं पर जो मुकदमे दायर किये गए हैं उन्हें वापस लेने की मांग उठी। फिलहाल इसी पर सभी किसान चर्चा कर रहे हैं।
                     शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि सरकार किसानों से वादाख़लिफ़ी कर रही है। इसलिए किसान प्रदर्शन के लिए मजबूर हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है।
                    बीजेपी सांसद और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है लेकिन किसान ज़िद पर अड़े हुए हैं। वहीं सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा कि ये किसान नही किसानों के भेष में उपद्रवी व मवाली हैं। राजनीतिक ऐजेंडे के तहत आंदोलन चल रहा है।
                       जंतर-मंतर पर किसानों की नारेबाजी और सरकार से तीनों कानून रद्द करने की मांग जारी है। प्रदर्शन कर रहे किसान जंतर-मंतर के एक छोटे से हिस्से में मौजूद हैं और पुलिस ने दोनों ओर अवरोधक लगा रखे हैं। इनकी किसान संसद की घोषणा के मद्देनजर संसद भवन के आसपास सुरक्षाबल मुस्तैद हैं। प्रदर्शन करने पहुंचे किसानों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी है। वहीं, पुलिसकर्मियों ने जंतर-मंतर को दोनों तरफ से सील कर दिया है। प्रदर्शन स्थल के आसपास मीडियाकर्मियों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं मिल रही है।

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