पालम विधानसभा मधु विहार वार्ड में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती

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September 8, 2026

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पालम विधानसभा मधु विहार वार्ड में धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- महर्षि वाल्मीकि जयंती को 17 अक्टूबर को पूरे देशभर में आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर द्वारका सेक्टर तीन, मधु विहार के सी ब्लॉक स्थित महाराणा प्रताप द्वार के पास बाल्मीकि मंदिर में महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई। स्थानीय निवासियों और भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ महर्षि वाल्मीकि की पूजा अर्चना की और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के चेयरमैन एवं मधु विहार रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान रणबीर सिंह सोलंकी ने मंदिर में पूजा अर्चना की। अपने संबोधन में सोलंकी ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वाल्मीकि संस्कृत के प्रथम कवि थे और उन्होंने हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ रामायण की रचना की।

सोलंकी ने वाल्मीकि के पूर्व जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका असली नाम रत्नाकर था और वे पहले एक डाकू थे। अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए वे जंगल में राहगीरों को लूटा करते थे। एक दिन जब उन्होंने महर्षि नारद को लूटने का प्रयास किया, तो नारद ने उन्हें सही राह दिखाई और उनके जीवन में परिवर्तन लाया। इसके बाद रत्नाकर ने घोर तपस्या की, जिसके दौरान उनके शरीर पर दीमकों ने घोंसला बना लिया, और तब से उनका नाम वाल्मीकि पड़ा। आगे चलकर वाल्मीकि महाकवि बने और ब्रह्मा जी की प्रेरणा से रामायण की रचना की।

इस अवसर पर मंदिर समिति के प्रधान जितेंद्र सिंह (बंटी), संरक्षक मदन भाई, सदस्य सरदार प्रेम प्रभाकर, राम यादव, सुरेश यादव, नीरज कनौजिया, फौजी भाई, डॉक्टर सुनील नवीन (गंजा), टोनी, रामवीर, संतोष, सनी, अध्यक्ष कुलदीप कुमार, और विनोद गोलू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर इस प्रकार का आयोजन समाज में उनके योगदान को स्मरण करने और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

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