नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- राजधानी दिल्ली के पालम स्थित राम चौक में हुए भीषण अग्निकांड ने शहर में व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की जान चली गई, जहां आग से ज्यादा घातक साबित हुई प्रशासनिक लापरवाही, अवैध पार्किंग का अतिक्रमण और अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दमकल विभाग को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिससे राहत कार्य में देरी हुई और स्थिति और भयावह बन गई।

दमकल और एनडीआरएफ अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहन बने। द्वारका रोड और फ्लाईओवर के नीचे खड़ी व्यावसायिक गाड़ियों ने रास्ता पूरी तरह जाम कर दिया था। भारी-भरकम हाइड्रोलिक फायर ब्रिगेड वाहन मौके तक पहुंच ही नहीं पाए। इतना ही नहीं, एक हाइड्रोलिक गाड़ी तकनीकी खराबी के कारण वापस लौट गई, जबकि दूसरी गाड़ी को पहुंचने में काफी समय लग गया, जो इस हादसे में फंसे लोगों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
राम चौक मार्केट तक जाने वाला रास्ता पहले से ही अवैध पार्किंग का केंद्र बना हुआ था। दिन में एक ओर ट्रक खड़े रहते हैं, जबकि रात में दोनों तरफ वाहनों की कतार लग जाती है, जिससे सड़क संकरी हो जाती है और बड़े वाहनों का निकलना लगभग असंभव हो जाता है। इसके अलावा इलाके में फैले बिजली के तारों का जाल भी रेस्क्यू कार्य में बाधा बना, जिससे राहत दल को मौके तक पहुंचने में और मुश्किलें आईं।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, वहां अग्नि सुरक्षा के बुनियादी मानकों का पालन नहीं किया गया था। चार मंजिला इमारत में केवल एक ही संकरा प्रवेश और निकास मार्ग था, जो आग लगते ही धुएं और लपटों से भर गया और ‘फायर ट्रैप’ बन गया। इससे ऊपरी मंजिल पर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना असंभव हो गया।

इसके अलावा इमारत में न तो फायर अलार्म की व्यवस्था थी और न ही पर्याप्त अग्निशमन उपकरण जैसे स्प्रिंकलर या अग्निशामक यंत्र मौजूद थे। यदि ये व्यवस्थाएं होतीं, तो आग पर समय रहते काबू पाया जा सकता था और लोगों को सतर्क किया जा सकता था। ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद कॉस्मेटिक दुकान में रखे ज्वलनशील पदार्थों और ऊपर के गोदाम में भरे सामान ने आग को और भड़काया, जिससे लपटें तेजी से फैल गईं।
दमकल विभाग के अनुसार सुबह करीब साढ़े छह बजे लगी आग दोपहर तक पूरी तरह काबू में नहीं आ सकी और ऊपरी मंजिलों से लगातार धुआं और लपटें निकलती रहीं। यह हादसा न सिर्फ एक गंभीर चेतावनी है, बल्कि यह दिखाता है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, तो ऐसी त्रासदियां दोहराई जा सकती हैं।


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