पहली ही बारिश में पालम में जलभराव से हाहाकार, सरकार के दावे हुए फेल

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May 17, 2026

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पहली ही बारिश में पालम में जलभराव से हाहाकार, सरकार के दावे हुए फेल

-सोंलकी ने उठाई सफाई व्यवस्था की जांच की मांग

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली में मानसून की पहली बारिश ने नगर निगम की सफाई तैयारियों की कलई खोल दी है। पालम क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव के कारण न सिर्फ यातायात प्रभावित हुआ बल्कि कई घरों में भी पानी घुस गया। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने एमसीडी के कर्मचारियों पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की।

बरसात से पहले सफाई के दावों की खुली पोल
पालम गांव की जाट चौपाल से लेकर ब्रह्म अपार्टमेंट और शहीद रामफल चौक तक का इलाका बारिश के पानी से लबालब भर गया। सबसे चिंताजनक स्थिति शिव मंदिर के पीछे आर जेड-1150 के पास देखने को मिली, जहां स्थानीय घरों में पानी घुस गया और निवासियों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई।
स्थानीय नागरिक सुरेंद्र सोलंकी ने बताया कि नालों की सफाई बरसात से पहले ठीक से नहीं की गई। “कर्मचारी केवल दिखावटी काम करके चले जाते हैं। नतीजा यह होता है कि थोड़ी सी बारिश में ही सड़कों पर नदी जैसी स्थिति बन जाती है,”।

फोरम ने जताई नाराजगी, प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग
फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के अध्यक्ष रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि वह पूर्व में भी उपायुक्त से बरसात पूर्व नालों की सफाई की मांग कर चुके हैं, लेकिन ठेकेदारों की मनमानी और इंजीनियरिंग स्टाफ की उदासीनता के चलते कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। “हर साल यही हालात होते हैं, लेकिन कोई जवाबदेही तय नहीं की जाती,“।
रणबीर सोलंकी ने उपायुक्त से मांग की कि संबंधित कर्मचारियों की जांच की जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही नालों की दोबारा सफाई कराई जाए ताकि आगामी बारिशों में नागरिकों को राहत मिल सके।

जनहित में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता
दिल्ली जैसे महानगर में हर वर्ष इसी तरह की समस्या का दोहराव सवाल खड़े करता है कि आखिर जिम्मेदारी कौन तय करेगा? पहली ही बारिश में डूबा पालम क्षेत्र इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्था में गंभीर सुधार की आवश्यकता है।

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