नेपाल में राजनीतिक संकट गहराया, बालेन शाह की युवाओं से शांति की अपील

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 4, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-हिंसा और आगजनी से तनावपूर्ण हालात

नेपाल/उमा सक्सेना/-     नेपाल    इस समय बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है। राजधानी काठमांडू और अन्य प्रमुख शहरों में बीते दो दिनों से विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के निजी आवास को निशाना बनाया, वहीं कई पूर्व प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों के घरों में भी आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ हुईं। हालात को काबू में रखने के लिए सेना को सड़कों पर उतारना पड़ा और देशभर में कर्फ्यू तथा प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

सरकार में इस्तीफों का दौर
राजनीतिक अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। अब तक चार मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें गृहमंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव शामिल हैं। इस्तीफों के इस सिलसिले के बीच, देश में अंतरिम सरकार बनाने की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है।

बालेन शाह की पहली प्रतिक्रिया
इस उथल-पुथल के बीच काठमांडू के मेयर बालेन शाह सामने आए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए युवाओं और जेन-ज़ी से शांति बनाए रखने और धैर्य रखने की अपील की है। शाह ने कहा कि नेपाल एक असाधारण परिस्थिति से गुजर रहा है, लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है। बहुत जल्द अंतरिम सरकार बनेगी, जो नए चुनाव कराएगी और जनता को नया जनादेश देगी।

अंतरिम सरकार पर बयान
बालेन शाह ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनके अनुसार यह कदम युवाओं की समझदारी, परिपक्वता और एकता को दर्शाता है। शाह ने यह भी कहा कि देश को स्थायी बदलाव चाहिए, न कि अस्थायी नेतृत्व। इसलिए चुनाव होना बेहद ज़रूरी है और किसी को जल्दबाजी में सत्ता संभालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर गुस्सा
नेपाल में इस विरोध आंदोलन के पीछे गहरी नाराज़गी छिपी है। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और नेताओं की ऐशो-आराम की जीवनशैली से तंग आकर युवा सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे ऐसा नेपाल चाहते हैं, जहाँ पारदर्शिता हो, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून हों और युवाओं को अपने देश में ही रोजगार के अवसर मिलें। यही वजह है कि कई जगहों पर युवा खुद क्षतिग्रस्त इमारतों और सड़कों की सफाई के लिए भी आगे आए।

आगे की राह पर टिकी निगाहें
फिलहाल नेपाल में हालात नाज़ुक बने हुए हैं। प्रधानमंत्री ओली और कई मंत्रियों के इस्तीफों के बाद सत्ता का संतुलन पूरी तरह हिल चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे एक नया नेपाल बनाना चाहते हैं, जिसमें युवाओं को विदेश पलायन न करना पड़े और वे अपने ही देश में काम कर सकें। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अंतरिम सरकार कब बनती है और चुनाव देश की राजनीति को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox