नदियों के अविरल एवम् निर्मल प्रवाह के लिए हस्ताक्षर संग्रह अभियान की शुरुआत

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नदियों के अविरल एवम् निर्मल प्रवाह के लिए हस्ताक्षर संग्रह अभियान की शुरुआत

-नदी संवाद के जरीये अगले तीन महीने में करायें जायेंगे 30 हजार हस्ताक्षर
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- नदी संवाद कार्यक्रम के आयोजन के बाद दिल्ली में यमुना नदी के संदर्भ में एवम् अन्य नदियों के अविरल एवम् निर्मल प्रवाह के लिए हस्ताक्षर संग्रह अभियान की शुरुआत हुई है। अब तक दिल्ली में तीन हजार हस्ताक्षर संग्रह हो पाया है। तीन महीने में तीस हजार का लक्ष्य पूरा होगा।
                 नदी संवाद का आगामी संभावित कार्यक्रमः- मई के अंत में सोनीपत और पानीपत में, जून के अंत में साहिबाबाद और गाजियाबाद में, जुलाई के अंत में फरीदाबाद और पलवल के लोगों के बीच, अगस्त के अंत में मथुरा, वृंदावन और आगरा के लोगों के बीच, नवंबर के अंत में दिल्ली एनसीआर के सभी लोगों को साथ लेकर नदी संवाद का एक बड़ा कार्यक्रम होगा। इस आयोजन के बाद नदी संवाद अभियान अपने अगले चरण में प्रवेश करेगा।
               यमुना जी की वर्तमान अविरलता एवम् निर्मलता की स्थिति का संकलन भी यमुना जी के किनारे के जिलों के कार्यकर्ता करेंगे। एक महीने में प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों के साथ आरडब्ल्यूए से सम्बन्धित लोगो से भी संपर्क किया जा रहा है। इसके साथ-साथ यमुना मिशन के द्वारा यमुना जी के किनारे दिल्ली में भी वृक्षारोपण हेतु प्रशासन से बात हो रही है और प्रशासन का भी सकारात्मक रुख नजर आया है। इस संदर्भ में पार्षदों, विधायकों से भी संपर्क किया जायेगा।
               रा. स्वा. आंदोलन का स्थापना दिवस दिल्ली में 15 मई को आयोजित किया जायेगा और हर वर्ष के समान प्रकृति केंद्रिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, नदी संवाद के क्षेत्र में काम कर रहे कुछ विभूतियों का सम्मान भी किया जायेगा।
               विचारधाराओं से परे जाकर संवादहीनता को तोड़ना और उन मसलों को चर्चा के केंद्र में लाना लोक संसद के प्रमुख उद्देश्यों में से एक हैं। जो मसले आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं उन पर संवाद होकर न्यूनतम सहमति बने और जिन मसलों पर सहमति बने उनपर सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की लोक संसद की कोशिश होगी। असहमति के बिंदुओं तक का रास्ता सबका अपना रहेगा, जिनके पास जमीन पर काम करने, समस्या विशेष का समाधान देने का अनुभव है, उन लोगों का समुदायों से मिलवाना लोक संसद की क्रिया विधि का हिस्सा रहेगा, जिनके पास समस्या है। नालेज शेयरिंग के साथ उसके एक्जक्यूशन लेवल पर भी ध्यान दिया जाएगा।
               अभी पहली लोक संसद आठ अप्रैल को दिल्ली मे हुई थी द्य इसमें धर्म, राज और समाज के भूत, वर्तमान और भविष्य पर विस्तार से चर्चा हुई जल्द ही इसकी प्रोसीडिंग्स को लिपिबद्ध कर जिम्मेदार संस्थानों को सौंपा जाना है।
               अगली लोक संसद, नारी संसद के रूप होगी द्य संभावित आयोजन स्थल ऋषिकेश है। इसमें ग्राम, ब्लॉक व जिला पंचायत स्तर पर बेहतरीन काम करने वाली महिलाओं, कोविड काल में अच्छा काम करने वाली महिलाओं की सहभागिता होगी। एक साल के भीतर सभी राज्यों में लोक संसद की राज्य इकाइयों (स्टेट चैप्टर) का गठन हो जाना है। इसके बाद इसका विस्तार जिला स्तर तक होगा।

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