दिल्ली के बापड़ौला में बिजनेस नॉलेज पार्क (केबीआई) की जगह बनेगी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिटी

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दिल्ली के बापड़ौला में बिजनेस नॉलेज पार्क (केबीआई) की जगह बनेगी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिटी

- 55 एकड़ जमीन पर दो साल में बनकर हो जायेगी तैयार, डीडीसी और ईपीआईपी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट फाउंडेशन के साथ हुआ करार

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- दिल्ली सरकार ने दिल्ली में  देशी-विदेशी विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिटी बनाने की योजना तैयार की है। इसके डीडीसी और ईपीआईपी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट फाउंडेशन के साथ करार हो चुका है। दिल्ली के बापड़ौला गांव की 55 एकड़ जमीन पर इस आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिटी को बनाया जायेगा।
                  इसे लेकर सरकार ने सलाहकार फर्म के साथ करार किया है, इसके बाद अब निर्माण की दिशा में काम शुरू हो गया है। सरकार का लक्ष्य है कि डेढ़ से दो वर्ष के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाने का काम पूरा हो जाए। इसके लिए सरकार प्रत्यक्ष रूप से करीब ढाई हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। पहले यहां बिजनेस नॉलेज पार्क (केबीआई) विकसित किया जाना था, लेकिन अब सरकार चाहती है कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर राजधानी में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिटी बने। ताकि तेजी से बढ़ रही इलेक्ट्रॉनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कुशल और प्रशिक्षित युवा तैयार हों, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक सिटी बसाई जा रही है। इसके लिए बीते दिनों डीडीसी और ईपीआईपी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट फाउंडेशन के साथ करार हो चुका है। इसके साथ ही सरकार जल्द ही कुछ और कंपनियों व संगठनों के साथ करार करने जा रही है, जिसके जरिए उत्पाद के डिजाइन, निर्माण, बिक्री, मरम्मत व अन्य सेवाओं के लिए निवेश आकर्षित किया जाएगा।

रानीखेड़ा में विनिर्माण केंद्र का काम अटका
मुंडका के रानीखेड़ा में 147 एकड़ जमीन पर विश्वस्तरीय विनिर्माण केंद्र बनाने का काम फिर अटक गया है। दिल्ली स्टेट इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कूड़ा निस्तारण से जुड़ा मामला एनजीटी में लंबित है, जिसके चलते निर्माण कार्य रुक गया है। कूड़ा संबंधी जिम्मेदारी डीडीए के कार्य क्षेत्र में आती है। जब तक एनजीटी से अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है। मुंडका में विनिर्माण केंद्र बनाने की कवायद 2017 से चल रही है।

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