मांझी के बेतुके बयान पर हिन्दू संगठन मौन क्यों, अगर किसी मुस्लिम ने ये कहा होता तो क्या होता

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मांझी के बेतुके बयान पर हिन्दू संगठन मौन क्यों, अगर किसी मुस्लिम ने ये कहा होता तो क्या होता

-हिन्दुत्व के रोम-रोम में बसने वाले राम मांझा को सद्बुद्धि दे
-बिहार के पूर्व सीएम मांझी ने राम को लेकर उठाये सवाल, बोले- वे भगवान नहीं, सिर्फ रामायण के पात्र
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/शिव कुमार यादव/– हिन्दू संस्कृति के आधार व हिन्दुत्व के रोम-रोम में बसने वाले राम पर यूं तो समय-समय पर कुछ दुर्बुद्धि लोग सवाल खड़े करते रहे है। लेकिन फिर भी भगवान राम के प्रति भारत में ही नही पूरे विश्व में श्रद्धा बढ़ी है। जिनके नाम मात्र लेने से ही तीनों लोकों से इंसान तर जाता है ऐसे भगवान राम का नाम हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी मरने से पहले यही कहा था हे राम। अब सवाल यह है कि आखिर जीतन राम मांझी ने इतना साहस कैसे दिखाया कि उन्होने हिन्दूओं की आत्मा को ही झकझोर दिया। क्या इसलिए की वो हिन्दू है और हिन्दू धर्म का अपमान कर सकते है। या फिर हिन्दू संगठन यह कहकर पल्ला झाड़ लेंगे की यह उनके निजि विचार है। अगर यही बात किसी मुस्लिम ने कही होती तो क्या हिन्दू संगठन फिर भी इसी तरह चुप्पी साधे रहते। भाजपा के धर्म के ठेकेदार भी चुप रहते। यह एक सोचनीय विचार है कि हमारे धर्म, देवताओं और आराध्यों के बारे में कोई कुछ भी बोल देता है और हम कुछ नही कहते। तो फिर हिन्दू धर्म की रक्षा तो स्वयं भगवान राम भी नही कर सकते।
यहां बता दे कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को जमुई में अंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करते हुए विवादित बयान दिया कि राम भगवान नहीं हैं, वे तो सिर्फ तुलसीदास व वाल्मीकि रामायण के पात्र हैं। मांझी ने अपने भाषण में कई अन्य ऐसी बातें कहीं, जिनसे विवाद खड़ा हो सकता है। मांझी ने कहा कि रामायण में अच्छी बातें लिखी हैं, इसलिए हम उसे मानते हैं, पर हम राम को नहीं जानते।
बिहार के पूर्व सीएम ने कहा कि पूजा-पाठ करने से कोई बड़ा नहीं होता। अनुसूचित जाति के लोगों को पूजा-पाठ करना बंद कर देना चाहिए। जो ब्राह्मण मांस खाते हैं, शराब पीते हैं, झूठ बोलते हैं, उनसे दूर रहना चाहिए। उनसे पूजा-पाठ नहीं कराना चाहिए। हिंदुस्तान अवाम मोर्चे (हम) के प्रमुख ने यह भी कहा कि आज राम की तरह कोई शबरी के जूठे बेर खाकर दिखाए। हमारे घर खाना खाए। मांझी ने कहा कि सवर्ण और उच्च जाति के लोग भारत के मूल निवासी नहीं हैं, वे बाहरी हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने राम, सवर्ण, हिंदू धर्म, ब्राह्मण आदि को लेकर ऐसी बातें कही हैं। पहले भी वे कई बार ऐसी बातें कर चुके हैं। गत वर्ष दिसंबर में भी ऐसी बातें कही थीं, जिनके बाद बवाल खड़ा हो गया था। इसके बाद उन्होंने एक और कदम उठाते हुए पटना में ब्राह्मण भोजन रखा था, लेकिन इसकी शर्त यह रखी थी कि जिन ब्राह्मणों ने जीवन में कभी पाप नहीं किया वे ही इसमें शामिल होंगे। इसके बाद एनडीए व भाजपा ने उन्हें समझाइश दी थी। मांझी 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे।
बार-बार मांझी हिन्दू धर्म, ब्राह्मण, सवर्ण जाति व राम पर अपने सवालों से वार करते रहे है। अब एक बार फिर उन्होने भगवान राम पर सवाल खड़ा कर दिया है। जबकि देश सत्ताधारी पार्टी आज भगवान राम का मंदिर बनवा रही है और उन्ही के नाम पर हिन्दुओं को इक्ट्ठा कर सत्ता में आई है। कांग्रेस भी अब इस बात को समझने तो लगी है लेकिन अभी भी उसके दिमाग में धर्मनिरपेक्षता का आडंबर छिपा हुआ है जबकि कांग्रेस से अभी तक ऐसा कोई काम नही किया जिससे उसकी छवि सभी धर्मों में अच्छी बनी हो। लेकिन आज जो जीतन राम मांझी समाज में एक नया नफरत का बीज बो रहे है क्या उसके खिलाफ बोलने वाला कोई नही है। या फिर देश सिर्फ वोट व सत्त की राजनीति के लिए ही बना है। कि वोट व समर्थन हमें दे दो और हमारे धर्म के लिए कुछ भी कह लो। मेरा मानना है कि यह नही होना चाहिए या तो हमे अपनी संस्कृति व धर्म के प्रति कठोर होना चाहिए या फिर हमें इनकी तिलांजलि दे देनी चाहिएं। मै तो यही कहुंगा की भगवान राम सभी को सद्बुद्धि दे ताकि लोग अपने धर्म के प्रति संजीदा रहे। हमें यह अधिकार भी नही है कि हम अपने धर्म के नाम पर दूसरों के धर्म को नीचा दिखाऐ। यह सही है कि हमारी सभ्यताऐं वर्ग विशेष के आवरण के साथ चली है लेकिन आजाद भारत ने वर्ण व वर्ग को तोड़कर आगे बढ़ना सीखा है लेकिन फिर भी हम अपनी संस्कृति को नही छोड़ सकते क्योंकि संस्कृति किसी समाज के लिए उसकी पहचान होती है और भगवान राम हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है इसलिए हम उनका अपमान रही सह सकते।

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