जेलों में अब पेशेवर अपराधियों से दूर रहेंगे विचाराधीन कैदी

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जेलों में अब पेशेवर अपराधियों से दूर रहेंगे विचाराधीन कैदी

-अपराध की पाठशाला रोकने के लिए जेल प्रशासन व पुलिस ने उठाया अहम कदम

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली की जेलों में अब अपराध की पाठशाला नही लगेगी। जेल प्रशासन ने तिहाड़ समेत दिल्ली की अन्य जेलों में विचाराधीन कैदियों को पेशेवर अपराधियों से दूर रखने का एक अहम फैसला लिया है। इसके लिए तिहाड़ और मंडोली जेल में एक-एक जेल को आरक्षित रखा गया है। यहां पर कोई भी ऐसा कैदी नहीं रखा जाएगा जो पहले से किसी अपराध में शामिल हो या फिर पहले भी अपराध कर चुका हो।


                 जानकारी के अनुसार तिहाड़ जेल को अपराध की पाठशाला के तौर पर देखा जाता है। यहां पर जब कोई पहली बार अपराध कर पहुंचता है तो कुख्यात बदमाश उसे पेशेवर अपराधी बनाने की कोशिश करते हैं। बदमाशों द्वारा उसे सिखाया जाता है कि किस तरह वह एक बड़ा अपराधी बन सकता है। कैसे वह वाहन चोरी, शराब तस्करी, हथियारों की तस्करी, लूट, डकैती  व हत्याओं जैसी वारदातों को उनके साथ मिलकर अंजाम दे सकता है। इसके अलावा कुछ गैंग ऐसे युवाओं को अपने साथ शामिल कर लेते हैं। उनकी मदद करने के नाम पर उन्हें अपने गैंग में शामिल करते हैं और बाहर निकलने पर उनसे अपराध करवाते हैं। ऐसे हजारों उदाहरण पुलिस के सामने आते रहे हैं जिसे देखते हुए पुलिस ने यह कदम उठाया है।
               ऐसे मामलों को रोकने के मकसद से तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल ने महत्वपूर्ण फैसला किया है। उन्होंने अब पहली बार अपराध कर जेल आने वाले कैदियों के लिए अलग जेल की व्यवस्था कर दी है। इसके लिए तिहाड़ जेल नंबर-4 और मंडोली की जेल नंबर-12 को आरक्षित कर दिया गया है। इन दोनों जेल में केवल ऐसे कैदियों को रखा जाएगा जो पहली बार अपराध करके पहुंचे हैं। इस बात को भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यहां जाने के लिए कोई कैदी झूठ न बोले। इसलिए जेल आने पर कैदी का फिंगरप्रिंट लिया जाएगा, इससे पता चलेगा कि वह पहले भी जेल आया है या नहीं, इसके बाद ही उसे इन दोनों जेलों में भेजा जाएगा।
                जेल के सूत्रों ने बताया कि इस पहल से दो महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। सबसे पहला कि पहली बार अपराध कर जेल पहुंचने वाले कैदी पेशेवर अपराधी बनने से बच सकेंगे। वह बुरी संगत से दूर रहेंगे तो उनके सुधरने की संभावना ज्यादा रहेगी। दूसरा जेल में बंद कुख्यात कैदियों की प्रताड़ना और जबरन उगाही का शिकार होने से उन्हें बचाया जा सकेगा। जेल प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से भविष्य में अपराध भी कम होंगे और अपराधी भी।
              यहां बता दें कि अभी तक पहली बार जेल आये कैदियों को भी तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल में पेशेवर बदमाशों के साथ ही रखा जाता था। लेकिन 24 मार्च को यह तय कर दिया गया कि अब से जो भी विचाराधीन कैदी जेल में आएंगे उन्हें निर्धारित की बई दो ही जेलों में रखा जाएगा, जिससे कि वह है पेशेवर अपराधियों के संपर्क में ना आये। जानकारी के अनुसार द्वारका, साकेत, रोहिणी, तीस हजारी और पटियाला हाउस कोर्ट के अंतर्गत आने वाले अंडर ट्रायल कैदियों को तिहाड़ के जेल नंबर 4 में ही भेजा जाएगा. जबकि कड़कड़डूमा कोर्ट के अंतर्गत आने वाले अंडर ट्रायल कैदियों को मंडोली के जेल नंबर 12 में रखा जाएगा। जो कैदी पहली बार जेल में लाए जाएंगे उनके रिकॉर्ड की जांच फिंगरप्रिंट के जरिए होगी, जिससे यह पता चल सके कि वह वास्तव में फर्स्ट टाइमर अंडर ट्रायल कैदी है या नहीं या वह पहले किसी दूसरे नाम से बंद तो नहीं हुआ था।
               तिहाड़ जेल के डायरेक्टर जनरल संदीप गोयल ने बताया कि इस योजना से बेहतर परिणाम आ सकता है। 24 मार्च को प्रिंसिपल सेक्रेट्री होम ने भी तिहाड़ के जेल नंबर 4 में इस तरह की तैयारियों का जायजा लिया था। वह तिहाड़ जेल हेडक्वार्टर के अलावा जेल नंबर 4, 6 और 2 में भी गए थे।

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