जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हो सकता है बड़ा बदलाव, कश्मीरी पंडितों को दिया जा सकता है नामित सदस्य का दर्जा

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 18, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हो सकता है बड़ा बदलाव, कश्मीरी पंडितों को दिया जा सकता है नामित सदस्य का दर्जा

-जे एंड के विधानसभा को लेकर परिसीमन आयोग कर सकता है सिफारिश
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों को नामित विधायकों के तौर पर एंट्री दी जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा एवं लोकसभा सीटों के लिए फिलहाल परिसीमन चल रहा है और अपनी फाइनल रिपोर्ट में आयोग की ओर से यह सिफारिश सरकार से की जा सकती है। दरअसल कश्मीरी पंडितों की आबादी घाटी में नाम मात्र की है और 1990 में हिंसा के बाद पलायन करने वाले परिवारों की वापसी भी बहुत सीमित है। ऐसे में उन्हें प्रतीकात्मक तौर पर प्रतिनिधित्व देते हुए नामित सदस्य विधानसभा भेजे जा सकते हैं। इस प्रावधान पर परिसीमन आयोग विचार कर रहा है। आयोग का कार्यकाल 6 मई को समाप्त हो रहा है।
                  अहम बात यह है कि परिसीमन आयोग की सिफारिश में इन नामित सदस्यों को विधानसभा में किसी भी मसले पर होने वाले मतदान में वोटिंग का अधिकार भी दिया जा सकता है। पैनल का मानना है कि कश्मीरी पंडितों को राज्य की व्यवस्था में भागीदारी का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा यह भी चर्चा हुई है कि क्या पलायन करने वाले कश्मीरी पंडित जहां भी हैं, वहीं से जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में मतदान कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडलों से परिसीन आयोग के सदस्यों ने बात की है। इसके बाद इस पर सहमति बनी है कि विधानसभा में कश्मीरी पंडितों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
                   परिसीमन आयोग में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना देसाई और मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा शामिल हैं। विधानसभा में कश्मीरी पंडितों का यह प्रतिनिधित्व धर्म या जाति के आधार पर नहीं होगा। इसकी बजाय इसका आधार यह होगा कि वे पीढ़ियों से राज्य की राजनीतिक व्यवस्था के हिस्सेदार रहे हैं। इस व्यवस्था का उदाहरण सिक्किम से लिया गया है, जहां बौद्ध भिक्षुओं को नामित सदस्य के तौर पर भेजने का नियम है। जम्म-कश्मीर विधानसभा में चुनाव के माध्यम से कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधित्व की बजाय नामित सदस्यों की व्यवस्था को ज्यादा सही माना जा रहा है। अब तक जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दो महिला सदस्यों को भेजने की व्यवस्था रही है।

समय-समय पर कश्मीरी पंडित प्रतिनिधित्व की करते रहे है मांग
ऐसा ही प्रावधान पुदुचेरी विधानसभा में भी है, जहां 30 सदस्य चुनाव के जरिए आते हैं। इसके अलावा 3 सदस्यों को केंद्र सरकार की ओर से नामित किया जाता है। यदि परिसीमन आयोग केंद्र सरकार से कश्मीरी पंडितों को लेकर यह सिफारिश करता है तो समुदाय की लंबे वक्त से चल रही मांग पूरी हो सकती है। कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से मांग की जाती रही है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह से भी समुदाय ने इसे  लेकर मांग की थी।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox