जब देश ने मनाया दशहरा, तब चेन्नई में जलाए गए राम के पुतले; देखती रह गई पुलिस

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September 18, 2026

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जब देश ने मनाया दशहरा, तब चेन्नई में जलाए गए राम के पुतले; देखती रह गई पुलिस

मानसी शर्मा/-  जब देशभर में दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले जलाए जा रहे थे, तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक अलग ही नज़ारा देखने को मिला। पेरियारवादी संगठन थंथई पेरियार द्रविड़र कड़गम (TDPK) ने ‘रावणन लीला’ मनाते हुए भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के पुतले जला दिए। यह घटना मायलापुर स्थित संस्कृत कॉलेज के बाहर हुई, जहां संगठन के करीब 40 कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर पुतले दहन को अंजाम दिया।

रामायण के खिलाफ विरोध या द्रविड़ पहचान की लड़ाई?

संगठन के नेता एस. कुमरन ने कहा कि यह विरोध उस सोच के खिलाफ है जिसमें रामायण में द्रविड़ों को राक्षस के रूप में दर्शाया गया है। उनका आरोप है कि हर साल दिल्ली और उत्तर भारत में रावण जैसे किरदारों का पुतला जलाकर द्रविड़ पहचान का अपमान किया जाता है। इसी के जवाब में वे ‘रावणन लीला’ मनाते हैं। कुमरन का यह भी दावा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

इस आयोजन को रोकने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर विरोध प्रदर्शन को अंजाम दिया। इसके बाद पुलिस ने 11कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और कोर्ट ने उन्हें रिमांड पर भेज दिया।

इतिहास दोहराया गया, बहस फिर हुई तेज

यह कोई पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो। 1970 के दशक में भी पेरियार समर्थकों ने ‘राम दहन’ का आयोजन किया था। 1974 में पेरियार की पत्नी मणियम्मै ने पहली बार चेन्नई में राम का पुतला जलाया था। दशकों बाद इस परंपरा को दोहराए जाने से रामायण, द्रविड़ राजनीति और सांस्कृतिक संघर्ष पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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