कोर्ट की कुर्की से डरी दिल्ली सरकार, किसान को 35 हजार रूपये देकर बचाई इज्जत

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May 15, 2026

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कोर्ट की कुर्की से डरी दिल्ली सरकार, किसान को 35 हजार रूपये देकर बचाई इज्जत

-द्वारका कोर्ट ने जाफरपुर के किसान के पक्ष में की थी दिल्ली सरकार के खिलाफ डिक्री
-नजफगढ़ एसडीएम ने डीएम के आदेश पर दी डिक्री की रकम
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/- द्वारिका कोर्ट दिल्ली के सिविल जज दिव्यम लीला ने दिल्ली सरकार के खिलाफ नजफगढ़ तहसीलदार के सामान की कुर्की के आदेश दिये थे जिससे डरकर नजफगढ़ एसडीएम अमित काले ने प्रताड़ित किसान को तहसीलदार के सामान की कुर्की के द्वारा होने वाली विभाग की बेइज्जती को बचाने के लिए कुर्की के 35 हजार रूपये दे दिये है। यह रकम एसडीएम ने सीधे किसान के खाते में जमा करा दी है।
               गौरतलब है कि द्वारका कोर्ट के जिला न्यायाधीश नरोत्तम कौशल ने 3 साल पहले जाफर पुर गांव के किसान मानसिंह के साथ ज्यादती करने व उसे प्रताड़ित करने की याचिका के मामले में किसान के हक में फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि वह किसान को 30000 रूपये का हर्जाना दे। फैसले में जिला जज ने कहा था कि किसान को सरकार कानूनी कार्यवाही में खर्च के रूप में 15000 रूपये व परेशानी उठाने के लिए 10,000 रुपये तथा अपील दायर करने के लिए हुए खर्चों के लिए 5000 रूपये का भुगतान करें। साथ ही उन्होंने 3 महीने में भुगतान न करने पर सरकार को ब्याज भी देने का आदेश दिया था। लेकिन सरकार ने तय समय में कोर्ट के आदेश का पालन नही किया जिसे देखते हुए कोर्ट ने सरकार के खिलाफ कुर्की आदेश पारित कर दिया था। 18 अप्रैल को कोर्ट के अधिकारी पीड़ित किसान के साथ एसडीएम नजफगढ़ कार्यालय कुर्की करने के लिए गये थे लेकिन एसडीएम नजफगढ़ ने यह कहते हुए कुर्की रूकवा दी कि विभाग किसान को 30 अप्रैल तक यह रकम चुका देगा। जिसपर एसडीएम नजफगढ़ ने 26 अप्रैल को किसान को कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई रकम उसके खाते में भेज दी।
                  कोर्ट के इस फैसले पर पीड़ित किसान के वकील उमेश यादव ने बताया कि हालांकि कोर्ट कार्यवाही में किसान मानसिंह के करीब 2 लाख रूपये खर्च हुए हैं। लेकिन सरकार से मात्र 35 हजार रूपये मिलने से भी वह संतुष्ट हैं। क्योंकि ये पैसा भी उन नकारा सरकारी अधिकारियों के मुंह पर एक तमाचा है जिनके कारण उन्हे इतनी परेशानी झेलनी पड़ी। श्री यादव ने बताया कि कोर्ट का ये फैसला उन नकारा अधिकारियों के खिलाफ एक चेतावनी है जो बिना वजह लोगों को परेशान करते है। उन्होने कहा कि आगे आने वाले समय में यह फैसला एक नजीर का काम करेगा और अधिकारी भी इस फैसले से डरकर कोई गलत काम करने की कोशिश नही करेंगे।

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