किसान आंदोलन में सिखों और हिन्दूओं को लड़ाने की थी साजिश

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किसान आंदोलन में सिखों और हिन्दूओं को लड़ाने की थी साजिश

- श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह का दावा, पीएम मोदी ने किये मंसूबे विफल

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/चंडीगढ़/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कृषि कानूनों की वापसी के फैसले के बाद पंजाब में बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच सिखों की सुप्रीम संस्था श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दावा किया है कि कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन की आड़ में सिखों-भारत सरकार और सिखों-हिंदुओं के बीच लड़ाई करवाने की साजिश रची जा रही थी। किसान आंदोलन के नाम पर कुछ असामाजिक तत्व भाईचारे का बंटवारा कर, द्वेष के बीज बो कर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहते थे। वहीं कुछ सिख भावनाओं को कमजोर करके सिख इतिहास को निशाने पर ले रहे थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले से उनके मंसूबे नाकाम हो गए। एक वीडियो में उन्होंने इसके लिए भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत उनकी पूरी कैबिनेट का धन्यवाद किया तथा कहा कि इसके लिए पीएम नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता की तारीफ बनती है।
                  जत्थेदार ने कहा कि कानून वापस के एलान होने से एक बड़ी राष्ट्रीय विपदा टल गई है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में कुछ ऐसे गुट थे, जो सिख सोच, निशान, फलसफे, इतिहास और भावनाओं को दरकिनार कर रहे थे। आने वाले समय में हमें इसके नुकसान झेलने पड़ते। जत्थेदार का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पंजाब शुरू से ही किसान आंदोलन का सिरमौर बना हुआ है। पंजाब से ही शुरू होकर यह आंदोलन पूरे देश में फैला।
                  पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीन विवादित कृषि कानून रद्द करने के फैसले का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रकाश पर्व के मौके पर तीन कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना और किसानों से माफी मांगना, इससे बड़ा कुछ नहीं हो सकता। कैप्टन ने कहा था कि प्रधानमंत्री देश के कल्याण के लिए कृषि कानून लाए थे।
                   इससे पहले पंजाब की कांग्रेस सरकार ने एलान किया था कि किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 700 किसानों की याद में एक स्मारक बनाया जाएगा। सीएम ने कहा कि आजादी के बाद अगर कोई बड़ा संघर्ष हुआ, तो वह कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन रहा है जिसने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया। इसलिए किसान आंदोलन के नाम पर राज्य में स्मारक स्थापित होगा।
                   आंदोलन के दौरान कुछ जिंदगी गई हैं, उनका हमेशा अफसोस रहेगा। बहुत बड़ी मात्रा में इस आंदोलन में विदेशी सिखों का पैसा खर्च हुआ। इस आंदोलन में जो लोग शामिल हुए, वह सिख परिवार थे। सिखों ने आर्थिक मदद और सहूलियत के रूप में जी-जान से इसमें योगदान दिया। हम हमेशा चाहते हैं कि भारत के अंदर सिख अच्छे ढंग से जिंदगी बिताएं। हिंदू-सिख का रिश्ता मजबूत रहे, इसके लिए हमेशा कोशिश करते रहे हैं।

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