एसजीटी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज 

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October 22, 2026

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-7 देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल

गुरुग्राम/उमा सक्सेना/-    गुरुग्राम स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह त्रिशताब्दी विश्वविद्यालय (एसजीटी विश्वविद्यालय) में आज से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। यह आयोजन मानविकी, सामाजिक विज्ञान एवं लिबरल आर्ट्स संकाय द्वारा भारतीय विश्व मामलों की परिषद के सहयोग और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के प्रायोजन में 25 और 26 फरवरी को आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय “भारत की नैरेटिव कूटनीति की बदलती गतिशीलता” रखा गया है।

बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की कूटनीतिक रणनीति पर मंथन
भू-राजनीतिक बदलाव, डिजिटल क्रांति, जलवायु संकट और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के दौर में कूटनीति के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन आया है। अब संवाद केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीकों, ऐतिहासिक स्मृतियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी आकार ले रहा है। सम्मेलन में इस बात पर विचार किया जाएगा कि भारत किस प्रकार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, ग्लोबल साउथ सहयोग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रवासी भारतीय नेटवर्क, योग, आयुर्वेद, बौद्ध विरासत, समुद्री संपर्क, खाद्य कूटनीति और सिनेमा जैसे माध्यमों के जरिए अपनी वैश्विक छवि को सशक्त बना रहा है।

बहुविषयक सत्रों में विशेषज्ञों की भागीदारी
यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय संबंध, सांस्कृतिक अध्ययन, मीडिया, सामरिक अध्ययन और डिजिटल मानविकी जैसे विषयों के संगम पर आधारित है। कार्यक्रम में प्लेनरी सत्र, मुख्य वक्तव्य, पैनल चर्चाएं और दस विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें 7 देशों तथा भारत के 18 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों से 150 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। ये प्रतिभागी 75 से अधिक विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और नीति-निर्माण से जुड़े संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

अकादमिक और नीति-निर्माण के बीच सेतु
आयोजकों का मानना है कि यह सम्मेलन अकादमिक विमर्श और नीति-निर्माण के बीच संवाद को मजबूत करेगा। साथ ही भारत की विकसित होती नैरेटिव कूटनीति को समझने और वैश्विक स्तर पर देश के बौद्धिक योगदान को रेखांकित करने में सहायक सिद्ध होगा।

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