उत्तराखंड में जुलाई में होंगे पंचायत चुनाव, ओबीसी आरक्षण को मिली नई मंजूरी

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September 22, 2026

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उत्तराखंड में जुलाई में होंगे पंचायत चुनाव, ओबीसी आरक्षण को मिली नई मंजूरी

देहरादून/- हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड के शेष 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब जुलाई में कराए जाएंगे। सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट कर दिया है और इसके साथ ही तैयारियां भी तेज़ हो गई हैं। वहीं, पंचायतों में ओबीसी आरक्षण के निर्धारण को लेकर लाया गया पंचायतीराज अधिनियम संशोधन अध्यादेश को राजभवन से मंजूरी मिल गई है।

पंचायतीराज सचिव चंद्रेश कुमार यादव के अनुसार, इसी माह ओबीसी आरक्षण की अंतिम अधिसूचना जारी कर दी जाएगी और इसकी जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजी जाएगी।

हरिद्वार में नहीं होंगे चुनाव, बाकी 12 जिलों में तैयारी पूरी

गौरतलब है कि हरिद्वार में पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश के साथ होते हैं, और वहां वर्ष 2022 में चुनाव हो चुके हैं। जबकि अन्य जिलों में पंचायतों का कार्यकाल नवंबर 2023 के अंत में समाप्त हो गया था। चुनाव न हो पाने की स्थिति में पंचायतों को प्रशासकों के हवाले कर दिया गया था।

इस बीच सरकार ने परिसीमन, निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का काम पूरा कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, ओबीसी आरक्षण का निर्धारण एक एकल समर्पित आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है।

आरक्षण में हुआ बड़ा बदलाव

पूर्व में पंचायतों में ओबीसी आरक्षण की अधिकतम सीमा 14 प्रतिशत थी, जिसे अब हटा दिया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण कुल मिलाकर 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। जिन क्षेत्रों में एससी-एसटी की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक है, वहां ओबीसी को आरक्षण नहीं मिलेगा।

जिला पंचायतों के लिए ओबीसी आरक्षण का निर्धारण शासन स्तर पर होगा, जबकि क्षेत्र और ग्राम पंचायतों के लिए यह कार्य जिला स्तर पर किया जाएगा।

प्रशासकों का कार्यकाल समाप्ति की ओर

पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल 27 मई और 31 मई को समाप्त हो रहा है। यदि इससे पहले चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाती है तो प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अन्यथा, सरकार को एक बार फिर पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन कर अध्यादेश लाना पड़ सकता है।

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