अविरल व निर्मल यमुना के लिए जुटेंगे एक लाख यमुना प्रेमी, बनेगी मानव श्रृंखला

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अविरल व निर्मल यमुना के लिए जुटेंगे एक लाख यमुना प्रेमी, बनेगी मानव श्रृंखला

- समाज को संवेदनशील करने की मुहिम के तहत विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर चार जून को होगा एतिहासिक आयोजन - यमुना दर्शन यात्रा पूरी होने पर की गई कालिंदी कुंज पर घोषणा, यमुना तट पर लगी यमुना पाठशाला - विशेषज्ञों ने बताया, नदी सिर्फ बहता पानी नहीं, पूरा फ्लड प्लेन उसका हिस्सा, नाले हों साफ, नम भूमि पुनर्जीवित

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- लोक संसद के द्वारा कालिंदी कुंज के यमुना तट पर यमुना पाठशाला लगाई गई। इसमें वजीराबाद से लेकर कालिंदी कुंज घाट तक 25 किमी. की यमुना पदयात्रा के दौरान यमुना की वास्तविक स्वरूप पर अनुभव साझा किया गया। आंकड़ों से कहीं ज्यादा यमुना की खराब सेहत को देखते हुए घोषणा की गई कि दिल्ली-एसीआर के लोगों को यमुना के तटों तक लाने के लिए चार जून को वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक यमुना संसद लगेगी। अपनी तरह की पहली मानव श्रृंखला में करीब एक लाख लोग शिरकत करेंगे। इस मौके पर पालम 360 गांव के प्रधान सुरेंद्र सोलंकी, दिल्ली पंचायत संघ दिल्ली प्रदेश थान सिंह यादव व सुरेश शौकीन, हाकर्स, रेहड़ी पटरी एसोसिएशन के अनिल बख्शी, स्वाभिमान देश की के संरक्षक सुरेंद्र बिधूड़ी, नामधारी समाज, इंग्लैंड से सुबा तरसेन सिंह, वाईएसएस के संस्थापक सचिन गुप्ता ने अपना पूरा समर्थन देने का वायदा किया।
                   पर्यावरणविद डॉ फैयाज खुरसर ने कहा कि यमुना का वास्तविक स्वरूप बिगड़ गया है। आज गंदे नालों व फैक्ट्रियों के विषैले रसायन सीधे यमुना में मिल रहे हैं। इस कारण यमुना व नाले में फर्क करना मुश्किल है। उनका कहना है नदी की सेहत बेहतर करने के लिए एक तरफ नालों का सीवेज साफ करना पड़ेगा। साथ ही नदी की किडनी के तौर पर काम करने वाली सभी नम भूमियों को पुनर्जीवित करना होगा। क्योंकि सवाल सिर्फ यमुना ही नहीं, उस पर निर्भर समूची दिल्ली प्रांत व एनसीआर का है।
                 लोक संसद के संयोजक रविशंकर तिवारी ने कहा कि यमुना से दूर रहकर हम दिल्लीवाले जितना समझते हैं, उससे बहुत ज्यादा यमुना जी की स्थिति खराब है। वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक की यमुना दर्शन यात्रा में शामिल करीब सौ लोगों ने एक सुर में इसे स्वीकार भी किया। ऐसी स्थिति में अब तय किया गया है कि हम सभी दिल्ली के लोग एक दिन उस मां यमुना के नजदीक जाएं, जो हमें ताउम्र पानी पिलाती है। यह कुछ-कुछ वैसा ही है, जैसे जब कोई अपना हॉस्पिटल में भर्ती होता है तो हम उसे देखने जाते हैं। पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर 4 जून को 4ः30 बजे न्यूनतम एक लाख लोग यमुना के साथ-साथ वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक खड़े होंगे। यह वही हिस्सा है, जिसमें यमुना सबसे ज्यादा प्रदूषित होती है।
                कार्यक्रम के संयोजक जीवकांत झा ने कहा कि 15 हजार नदियों में से 4500 विलुप्त हो गई है और 30 लाख कुँयो में से 20 लाखों का कुछ पता ही नहीं है। वहीं, लोक संसद से जुड़े एस राहुल ने कहा कि अब समय आ गया है  मां की ओर देखने का, मां की सच्ची सेवा का। मां यमुना को अविरल व निर्मल बनाने के लिए आम जन को आगे आना होगा। इसके पूर्व यमुना की वास्तविक स्थिति का आकलन के लिए आईटीओ यमुना पुल से पदयात्रा शुरू की गई, जो यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन, अक्षरधाम, निजामुद्दीन पुल, चिल्ला खादर, डीएनडी होते हुए कालिंदी कुंज पर यमुना पाठशाला में तब्दील हो गई।
                   इस मौके पर पूर्व मेयर अवतार सिंह, स्वाभिमान देश का संस्था के संस्थापक अध्यक्ष सुरेंद्र बिधूड़ी, इंग्लैंड से सुबा तरसेन सिंह, सरिता विहार मण्डल अध्यक्ष पवन पांडे, अरुण सिंह, जन्मेजय शर्मा, अरुण सिंह, आलोक सिंह, सुदामा यादव, बिट्टू गुप्ता, अनिल , सुदेश शर्मा समेत बड़ी संख्या में दिल्ली-एनसीआर के लोग मौजूद थे।

हम यमुना के लोग
यमुना तट पर अब तक की सबसे लंबी मानव श्रृंखला का निर्माण करने जा रहे हैं।

कहां?
 यमुना जी के साथ-साथ, वजीराबाद से कालिंदी कुंज तक.

कब?
4 जून, शाम 4ः30 बजे.

हासिल क्या?
यमुना बीमार है, उसको नजदीक से देखने, देखकर महसूस करने कि वह बीमार है. यह वैसे ही है, जैसे गलती मानते ही सुधार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.
                 यह समझना और समझकर प्रण लेना कि अब से हमारी कोशिश यमुना जी को स्वच्छ करने की होगी. जिससे हमारे बच्चों, आने वाली पीढ़ियों को यमुना वैसी ही मिले, जैसी हमारे पुरखों ने हमको दी थी। पूरी दिल्ली जब एक साथ यमुना जी की पीड़ा को महसूस करेगी, तभी यह मसला राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ पाएगा और केवल तभी अविरल व निर्मल यमुना का हमारा सपना पूरा हो पाएगा। आपकी भागीदारी के बिना यह संभव नहीं है।

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