अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर कानूनी दिग्गजों की अपील- ‘संवैधानिक साक्षरता बढ़ेगी तो मिलेगा सच्चा न्याय’

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अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर कानूनी दिग्गजों की अपील- ‘संवैधानिक साक्षरता बढ़ेगी तो मिलेगा सच्चा न्याय’

-आरजेएस डिजिटल शिखर सम्मेलन में कानूनी जागरूकता -महिलाओं के अधिकार, विचाराधीन कैदियों, श्रमिक शोषण और प्रवासी भारतीयों की कानूनी सुरक्षा पर हुई विस्तृत चर्चा!

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर आरजेएस पीबीएच (राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस) द्वारा आयोजित 602वें डिजिटल शिखर सम्मेलन में देश के वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आम नागरिकों के बीच संवैधानिक एवं कानूनी साक्षरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं का कहना था कि कानून की जानकारी के अभाव में लाखों लोग अनावश्यक रूप से जेलों में बंद हैं, आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं और अपने मौलिक अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन आरजेएस पीबीएच के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने किया, जबकि सह-आयोजक सरिता कपूर ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का विषय था— “अपने अधिकार जानो, अपनी शक्ति पहचानो: ज्ञान ही न्याय की पहली सीढ़ी है।”

गरीबों की कानूनी अज्ञानता बनी बड़ी चुनौती
मुख्य अतिथि एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संग्राम पटनायक ने कहा कि कानूनी जानकारी के अभाव में कई गरीब विचाराधीन कैदी वर्षों तक जेलों में बंद रहते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पूर्व टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मामूली मामलों में भी लोग केवल इसलिए जेल में हैं क्योंकि वे जमानत के अपने अधिकार और कानूनी सहायता से अनजान हैं।

उन्होंने माध्यमिक स्तर से ही संवैधानिक और कानूनी शिक्षा को अनिवार्य बनाने की वकालत करते हुए कहा कि इससे समाज में शोषण और अन्याय की घटनाओं में कमी आएगी।

विदेश जाने वाले भारतीयों को कानूनी जानकारी जरूरी
दिल्ली बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मुरारी तिवारी ने विदेश में पढ़ाई या नौकरी करने वाले भारतीयों को स्थानीय कानूनों की जानकारी रखने की सलाह दी। उन्होंने एक भारतीय छात्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि स्थानीय नियमों की जानकारी न होने के कारण उसे विदेश में लंबे समय तक जेल की सजा भुगतनी पड़ी। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में जाने से पहले वहां के बुनियादी कानूनों की जानकारी लेना बेहद आवश्यक है।

श्रमिकों और किरायेदारों के अधिकारों पर जोर
संग्राम पटनायक ने निर्माण स्थलों पर मजदूरों के शोषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि श्रमिकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना बिल्डरों की कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों पर भी प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि बिना न्यायिक प्रक्रिया अपनाए किसी किरायेदार को जबरन घर से नहीं निकाला जा सकता।

महिलाओं के अधिकारों पर विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम में महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और कानूनी सुरक्षा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पटनायक ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को समानता और भेदभाव से संरक्षण का अधिकार प्राप्त है।

उन्होंने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम-2005, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम तथा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में हुए संशोधनों की जानकारी देते हुए बताया कि बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हैं।

मुफ्त कानूनी सहायता का ऐलान
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संग्राम पटनायक ने आरजेएस पीबीएच मंच के माध्यम से जरूरतमंद, बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रवासी भारतीयों और लंबित मामलों पर भी हुई चर्चा
संवाद सत्र में विदेशों में रह रहे भारतीयों ने भी अपनी चिंताएं साझा कीं। वक्ताओं ने अदालतों में मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने और कानूनी सहायता की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हुए नागरिकों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

आगामी कार्यक्रमों की घोषणा
कार्यक्रम के अंत में आरजेएस के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने आगामी सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई को नेल्सन मंडेला श्रद्धांजलि कार्यक्रम, 24 जुलाई को स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता सम्मेलन, कारगिल विजय दिवस पर विशेष आयोजन तथा 7 अगस्त को युवाओं के लिए व्यक्तित्व विकास एवं संवैधानिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर “सेल्फी विद तिरंगा” और “हरित भारत” अभियान भी चलाया जाएगा।

कानूनी जागरूकता को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
शिखर सम्मेलन का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि कानून केवल अपराधियों को दंडित करने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने वाला सशक्त उपकरण है। वक्ताओं ने सभी नागरिकों से संविधान और कानून की जानकारी को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

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