IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ की धोखाधड़ी 

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October 9, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-शेयर बाजार में मचा हड़कंप

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद बैंकिंग जगत और शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। यह मामला हरियाणा सरकार से जुड़े खातों के एक समूह तक सीमित बताया जा रहा है। 18 फरवरी 2026 को खातों के मिलान के दौरान बैलेंस में गड़बड़ी पकड़ी गई, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ।

कैसे अंजाम दिया गया फर्जीवाड़ा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्तियों के साथ कथित मिलीभगत कर जाली चेक और फर्जी प्राधिकरण पत्रों का इस्तेमाल करते हुए मैन्युअल ट्रांजेक्शन के जरिए बड़ी रकम अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी। बैंक प्रबंधन ने चार संदिग्ध अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गहराई से जांच के लिए केपीएमजी को स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस बीच हरियाणा सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित बैंक को अपने पैनल से हटाने का निर्णय लिया है और विभागों को खाते बंद करने के निर्देश दिए हैं।

निवेशकों को 14,000 करोड़ से अधिक का झटका
धोखाधड़ी की खबर सामने आते ही शेयर बाजार में बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। एक ही कारोबारी सत्र में शेयर करीब 20 प्रतिशत तक लुढ़क गए, जिससे निवेशकों की लगभग 14,438 करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घट गई। यह गिरावट पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि कथित गड़बड़ी की राशि बैंक के हालिया तिमाही शुद्ध लाभ से भी अधिक है।

सीईओ की सफाई: ‘सिस्टम फेल्योर नहीं’
बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी. वैद्यनाथन ने बयान जारी कर कहा कि यह कोई प्रणालीगत विफलता नहीं, बल्कि एक शाखा और एक ग्राहक समूह से जुड़ी अलग-थलग घटना है। उनके अनुसार, बैंक में ‘मेकर-चेकर-ऑथराइजर’ जैसी नियंत्रण प्रणाली मौजूद है, लेकिन कथित आपराधिक मिलीभगत के चलते नियमों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बैंक की पूंजी स्थिति मजबूत है और वित्तीय प्रभाव प्रबंधनीय रहेगा। साथ ही संदिग्ध खातों में मौजूद राशि पर रोक लगाने के लिए अन्य बैंकों से संपर्क किया गया है।

आरबीआई की नजर, प्रणालीगत जोखिम से इनकार
पूरे घटनाक्रम पर भारतीय रिज़र्व बैंक की भी नजर बनी हुई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि मामले की निगरानी की जा रही है और इससे व्यापक बैंकिंग प्रणाली को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि घटना विशिष्ट खातों तक सीमित है और अन्य ग्राहकों की जमा राशि सुरक्षित है।

यह प्रकरण बैंकिंग क्षेत्र में शाखा-स्तरीय नियंत्रण, निगरानी तंत्र और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल बाजार और निवेशकों की नजर फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट और कथित तौर पर स्थानांतरित राशि की रिकवरी पर टिकी हुई है। आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि बैंक की साख और निवेशकों का भरोसा किस हद तक प्रभावित होगा।

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