दिल्ली के थोक बाजारों में मेड इन इंडिया के नाम पर बिक रहा चीनी माल

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दिल्ली के थोक बाजारों में मेड इन इंडिया के नाम पर बिक रहा चीनी माल

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- एक तरफ सीमाओं पर चीन से तनातनी और दूसरी तरफ देश में चीन के सामान के विरोध के बावजूद देश की राजधानी दिल्ली के थोक बाजारों में मेड इन इंडिया के नाम पर चीन का सामान धड़ल्ले से बिक रहा है और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे तमाशा देख रहा है।
सदर बाजार में चाइना निर्मित लड़ी और सजावटी लाइटें इस बार भी दीपावली से पहले खूब बिक रही हैं। अंतर बस इतना है कि इन्हें स्वदेशी बताकर बेचा जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार उनके पास भारत में बनी लाइटों की कई वैरायटी आई हैं, जो आकर्षक और सस्ती हैं। सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष की मानें तो बाजार में चाइना निर्मित सामानों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरें छापकर और शुभ-लाभ लिखकर बेचा जा रहा है।
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने बताया कि दुकानदारों ने लॉकडाउन से पहले ही चीन से भारी मात्रा में सामान मंगा लिया था। अब उन सामानों को बेचना दुकानदारों की मजबूरी भी है, लेकिन बाजार में बिक रही ज्यादातर एलईडी लाइटें, लड़ियां चाइना निर्मित ही हैं। थोड़ी बहुत भारत में निर्मित लड़ियां भी बाजार में आई हैं, लेकिन वह महंगी हैं। चाइना की लड़ी 200 से 300 रुपये में मिल रही हैं तो भारतीय लड़ी की कीमत 500 रुपये के पार है। सरकार को इस बात का ध्यान देना होगा। राकेश कुमार यादव ने बताया कि मौजूदा समय भारत में सजावटी लाइटों और लड़ियां बनाने के लिए गुजरात में दो प्लांट लगाए गए हैं, लेकिन वहां पर इतना ज्यादा उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इनकी मानें तो बाजार में अब भी 95 प्रतिशत लड़ियां और सजावटी सामान चाइना निर्मित हैं। देश में इन सामानों की निर्माण प्रक्रिया शुरू कराने के लिए भारत सरकार को आगे आकर इकाइयां लगाने में व्यावसायियों की मदद करनी होगी। विदेशी सामानों के आयात पर भी लगाम लगानी होगी। 
सदर बाजार में लड़ियां, रंग-बिरंगे लैंप और झूमर से सजी दुकान के मालिक नवीन कुमार ने बताया कि उनके पास इस बार कई खूबसूरत स्वदेशी सामान हैं, जिनकी बिक्री खूब हो रही है। उन्होंने लॉकडाउन से पहले चीन की बनी लड़ियां मंगाई थी, जिन्हें वह इंडियन फिटिंग करके बेच रहे हैं। लॉकडाउन के बाद चाइना का माल नहीं खरीदा है। कई सामानों पर लगा मेड इन इंडिया का टैग दिखाया। उनके पास 350 रुपये में 10 पीस गोल्डन लैंप, दिल्ली में निर्मित 80 रुपये में 12 पीस दीया, 100 रुपये में रंगीन लाइटों वाले झूमर और 80 रुपये में लोटस लैंप की बिक्री खूब हो रही है। सबसे ज्यादा घर के मुख्य दरवाजे पर लटकाने के लिए स्टार और स्वास्तिक लाइटें खरीदी जा रही हैं। इनकी कीमत 50 से 100 रुपये तक है। यहां चीन की बनी लोटस लाइट और गोल लाइट भी उपलब्ध हैं, जो भारत में निर्मित लाइटों से सस्ती हैं। इनकी कीमत 30 से 50 रुपये है।
एक अन्य दुकानदार संजय के पास दरवाजों पर लटकाने के लिए 50-70 रुपये में झूमर मिल रहा है। एलईडी लाइटों की भी भरमार है। उनके पास 12 रंग की एलईडी लाइटों वाली लड़ियां 500 से 700 रुपये में मिल रही हैं। सबसे ज्यादा मांग चाइना की निर्मित लड़ियों की है। सुखविंदर ने बताया कि उनकी दुकान में भी चाइना का माल काफी है, परंतु लॉकडाउन के बाद बाजार में एक भी सामान चाइना से नहीं आया है। उन्होंने कहा कि 4 महीने के बाद सदर बाजार में एक भी सामान चाइना निर्मित नहीं मिलेगा। सरकार को भी स्वदेशी सामानों को बनानेके लिए बढ़ावा देना होगा।

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