आर्थिक राहत पैकेज पर पुनर्विचार करे केंद्र सरकार -राहुल गांधी ने

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April 15, 2026

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आर्थिक राहत पैकेज पर पुनर्विचार करे केंद्र सरकार -राहुल गांधी ने

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार से आग्रह किया कि वह आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार करें और लोगों के खातों में सीधे पैसे डालें क्योंकि इस वक्त उन्हें कर्ज की नहीं, बल्कि सीधी आर्थिक मदद की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लॉकडाउन को समझदारी एवं सावधानी के साथ खोलने की जरूरत है और बुजुर्गों एवं गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
                               श्री गांधी ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, जो पैकेज होना चाहिए था वो कर्ज का पैकेज नहीं होना चाहिए था। इसको लेकर मेरी निराशा है। आज किसानों, मजदूरों और गरीबों के खाते में सीधे पैसे डालने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आप कर्ज दीजिए, लेकिन भारत माता को अपने बच्चों के साथ साहूकार का काम नहीं करना चाहिए, सीधे उनकी जेब में पैसे देना चाहिए। इस वक्त गरीबों, किसानों और मजदूरों को कर्ज की जरूरत नहीं, पैसे की जरूरत है। उन्हांेनंे कहा कि सरकार कर न मंशा ठीक है और न ही नीति, सरकार बड़ी-बड़ी कंपनियों के तो कर्ज माफ कर रही है उन्हे अनेकों सुविधाऐं प्रदान कर रही है लेकिन जो मजदूर व गरीब रोटी और काम न होने के वजह से पलायन कर रहे है उनके लिए सरकार की कोई सीधी योजना नही है। ऐसे संकट के काल में सरकार गरीबों की मदद करने की बजाये उन्हे कर्ज के जाल में ही फांसने का काम करने में लगी है।
                    कांग्रेस नेता ने कहा, मैं विनती करता हूं कि नरेंद्र मोदी जी को पैकेज पर पुनर्विचार करना चाहिए। किसानों और मजदूरों को सीधे पैसे देने के बारे में सोचिए। उन्होंने कहा, मैंने सुना है कि पैसे नहीं देने का कारण रेटिंग है। कहा जा रहा है कि वित्तीय घाटा बढ़ जाएगा तो बाहर की एजेंसियां हमारे देश की रेटिंग कम कर देंगी। हमारी रेटिंग मजदूर, किसान, छोटे कारोबारी बनाते हैं। इसलिए रेटिंग के बारे में मत सोचिए, उन्हें पैसा दीजिए। गांधी के मुताबिक लॉकडाउन खोलते समय समझदारी और सावधानी की जरूरत है। हमें इसे ध्यान से हटाना है। हमारे बुजुर्गों, हृदय, फेफड़े और किडनी के रोग से ग्रसित लोगों की रक्षा करनी चाहिए।

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