
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/फरीदाबाद /राज्य ब्यूरो,। शहर में कूड़ा निस्तारण को लेकर नगर निगम की रणनीति में एक बार फिर बदलाव के संकेत मिले हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाखरी में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने के बजाय प्रतापगढ़ केंद्र की क्षमता बढ़ाने और शहर के बड़े कलेक्शन प्वाइंट पर प्रोसेसिंग मशीनें लगाने की योजना सामने आई। हालांकि, इससे एक दिन पहले कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय ने भाखरी में 600 टन प्रतिदिन क्षमता वाले आधुनिक प्री-प्रोसेसिंग प्लांट को मंजूरी मिलने की जानकारी दी थी। ऐसे में दोनों घोषणाओं के बीच स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है कि कौन से योजना सिरे चढ़ेगी।
भाखरी में 20 नवंबर तक कूड़ा डालने की बात
मंगलवार को सेक्टर-16 स्थित सर्किट हाउस में हुई बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, विधायक धनेश अदलखा, विधायक सतीश फागना, नगर निगम कमिश्नर यशेंद्र सिंह और अन्य अधिकारी व पार्षद मौजूद रहे।
बैठक के बाद कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि भाखरी में 20 नवंबर तक ही कूड़ा डाला जाएगा। इसके बाद वहां से कूड़ा हटाने और दूसरी जगहों पर निस्तारण की व्यवस्था करने की योजना है। इसके लिए शहर के प्रमुख कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट पर मशीनें लगाई जाएंगी, ताकि कचरे की प्रोसेसिंग उसी स्थान पर हो सके।
प्रतापगढ़ प्लांट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
बैठक में प्रतापगढ़ स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां फिलहाल लगभग 200 टन प्रतिदिन कचरे के निस्तारण की व्यवस्था बताई गई है। इसे बढ़ाकर 750 टन प्रतिदिन करने की तैयारी है।
मुजेरी में भी 200 टन क्षमता वाला कूड़ा निस्तारण प्लांट संचालित होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा शहर के 10 बड़े कलेक्शन प्वाइंट पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना है। हालांकि, मशीनों की स्थापना, परियोजना की समयसीमा और नई व्यवस्था के पूरी तरह चालू होने की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
रोजाना 1200 टन कचरे का प्रबंधन बड़ी चुनौती
फरीदाबाद में विभिन्न स्रोतों से प्रतिदिन करीब 1200 टन कचरा निकलता है। बंधवाड़ी में कूड़ा डालने पर रोक के बाद नगर निगम के सामने इसके निस्तारण की समस्या बढ़ गई है। प्रतापगढ़ और नचौली जैसे केंद्रों पर भी कचरे का दबाव है।नक्शे देखें
ऐसे में केवल कूड़ा दूसरी जगह भेजना पर्याप्त नहीं होगा। शहर में निकलने वाले कचरे की छंटाई, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण के लिए पर्याप्त क्षमता विकसित करना जरूरी है।
भाखरी में विरोध के बीच बदली योजना
अरावली क्षेत्र के गांव भाखरी में डंपिंग यार्ड बनाए जाने की योजना का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों की चिंता है कि कचरे के ढेर से दुर्गंध फैलेगी, पर्यावरण प्रभावित होगा और आसपास की प्राकृतिक हरियाली को नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय लोगों का विरोध 7 अक्टूबर से जारी है।
इसी बीच कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय ने 26 अक्टूबर को जानकारी दी थी कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 24 अक्टूबर को हाई पावर वर्क्स कमेटी की बैठक में भाखरी में 600 टन प्रतिदिन क्षमता वाले आधुनिक प्री-प्रोसेसिंग प्लांट की परियोजना को मंजूरी दी है।
600 टन क्षमता वाले प्लांट पर 17.12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
विपुल गोयल के कार्यालय के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना में तीन ट्रॉमेल मशीनें, एक श्रेडर और एक बेलिंग मशीन लगाने की योजना है। प्लांट में करीब 35 कर्मचारियों की तैनाती प्रस्तावित है। दुर्गंध नियंत्रण के लिए बायो कल्चर स्प्रे और गंदे पानी के शोधन के लिए एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
इस परियोजना के तहत लगभग 4.38 लाख मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरे के प्रसंस्करण पर करीब 17.12 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। पर्यावरणीय मानकों के पालन का भी दावा किया गया है।
अब आगे क्या होगा?
भाखरी में प्रस्तावित प्लांट की मंजूरी और कृष्णपाल गुर्जर की बैठक में सामने आई नई रणनीति के बीच नगर निगम की अंतिम योजना महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भाखरी में प्रस्तावित सुविधा स्थापित होगी या कचरे के निस्तारण का मुख्य भार प्रतापगढ़ और अन्य कलेक्शन प्वाइंट पर डाला जाएगा।
शहरवासियों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि 20 नवंबर के बाद भाखरी से कूड़ा हटाने की प्रक्रिया कब शुरू होगी और प्रतिदिन निकलने वाले 1200 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।





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