दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या पर लगेगी लगाम, सरकार ने 2.5 लाख की सीमा का प्रस्ताव रखा

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October 19, 2026

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दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या पर लगेगी लगाम, सरकार ने 2.5 लाख की सीमा का प्रस्ताव रखा

-दिल्ली सरकार ने राजधानी में बेकाबू होती ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करने के लिए 'दिल्ली ई-रिक्शा योजना, 2026' का ड्राफ्ट जारी किया है.

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/ ब्यूरो, : राजधानी दिल्ली की सड़कों पर बड़ी संख्या में दौड़ रहे ई-रिक्शा की संख्या अब सीमित करने की तैयारी है. दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने की दिशा में एक ड्राफ्ट योजना जारी की है, जिसमें राजधानी में ई-रिक्शा की अधिकतम संख्या 2.5 लाख तय करने का प्रस्ताव रखा गया है. दिल्ली सरकार का तर्क है कि ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती संख्या से कई इलाकों में ट्रैफिक जाम, सड़क सुरक्षा व प्रदूषण से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. हालांकि, यह अभी अंतिम फैसला नहीं हैं. दिल्ली सरकार ने ड्राफ्ट पर लोगों व संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं. सुझावों के बाद इसमें बदलाव भी संभव है.

आखिर सरकार को संख्या सीमित करने की जरूरत क्यों पड़ी

दिल्ली में ई-रिक्शा पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं. खासतौर पर मेट्रो स्टेशन, बाजार, कॉलोनियों व मुख्य सड़कों के बीच आने-जाने के लिए बड़ी संख्या में लोग इनका इस्तेमाल करते हैं. कई ऐसे इलाके हैं, जहां ई-रिक्शा लोगों को उनके घर या बाजार तक पहुंचाने के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराते हैं. लेकिन दूसरी तरफ, ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को लेकर ट्रैफिक व्यवस्था पर दबाव की शिकायतें भी सामने आती रही हैं. संकरी सड़कों, बाजारों व मेट्रो स्टेशनों के आसपास बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खड़े होने से कई बार जाम की भी स्थिति बनती है. इसी वजह से दिल्ली सरकार अब इनकी संख्या, संचालन व स्वामित्व को एक तय व्यवस्था के तहत लाने की कोशिश कर रही है.

2.5 लाख की सीमा का मतलब क्या है

ड्राफ्ट योजना का सबसे बड़ा प्रस्ताव ये है कि दिल्ली में ई-रिक्शा की कुल संख्या 2.5 लाख से अधिक नहीं होने दी जाए. इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में ई-रिक्शा के नए पंजीकरण व संचालन को इसी सीमा के हिसाब से नियंत्रित किया जा सकता है. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि मौजूदा ई-रिक्शाओं के साथ अंतिम नीति लागू होने के बाद किस तरह की व्यवस्था अपनाई जाएगी. इसलिए फिलहाल ये कहना सही नहीं होगा कि 2.5 लाख से ज्यादा ई-रिक्शा तुरंत सड़कों से हटा दिए जाएंगे. ये बात अंतिम योजना व उसके क्रियान्वयन के नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी.

एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम पांच ई-रिक्शा

ड्राफ्ट में ई-रिक्शा के स्वामित्व को लेकर भी सीमा प्रस्तावित की गई है. इसके तहत एक व्यक्ति अधिकतम पांच ई-रिक्शा का मालिक हो सकेगा. इसका मकसद ई-रिक्शा के स्वामित्व को कुछ बड़े मालिकों तक सीमित होने से रोकना व व्यवस्था को ज्यादा नियंत्रित बनाना है. इस प्रावधान का असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है जो कई ई-रिक्शा खरीदकर उन्हें अलग-अलग चालकों को किराये पर देते हैं. अंतिम नियमों में ये स्पष्ट होगा कि पहले से पांच से अधिक ई-रिक्शा रखने वाले मालिकों के लिए क्या व्यवस्था होगी.

हर ई-रिक्शा के लिए होगा कंप्लायंस सर्टिफिकेट

प्रस्तावित योजना में ई-रिक्शा के संचालन को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की भी बात कही गई है. इसके लिए ई-रिक्शा कंप्लायंस सर्टिफिकेट (ECC) की व्यवस्था प्रस्तावित है. यानी ई-रिक्शा को निर्धारित शर्तें पूरी करने के बाद ही संचालन की अनुमति मिलेगी. चालकों के लिए भी नियमों को सख्त करने का प्रस्ताव है. चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी होगा. इसके साथ ही एक चालक को एक से ज्यादा ECC से जोड़ने की अनुमति नहीं होगी.

ई-रिक्शा चालकों पर क्या होगा असर

इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनकी रोजी-रोटी ई-रिक्शा चलाने से जुड़ी है. दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग ई-रिक्शा चलाकर परिवार चलाते हैं. ऐसे में संख्या पर सीमा लगने के बाद नए लोगों के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं. दूसरी तरफ़ सरकार का तर्क है कि नियमों से व्यवस्था बेहतर होगी. निर्धारित संख्या, लाइसेंस और अनुपालन प्रमाणपत्र के कारण अनधिकृत या नियमों का पालन नहीं करने वाले ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई करना आसान हो सकता है.

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा

यात्रियों के नजरिए से देखें तो प्रस्तावित नीति का असर दो तरह से हो सकता है. यदि ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित होने के साथ उनके संचालन के लिए बेहतर रूट व पार्किंग व्यवस्था बनाई जाती है, तो मेट्रो स्टेशनों व बाजारों के आसपास जाम कम हो सकता है. इससे पैदल चलने वालों और दूसरे वाहन चालकों को भी राहत मिल सकती है.

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