एसजीटी यूनिवर्सिटी में रामानुजन की विरासत पर अंतरराष्ट्रीय मंथन

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May 9, 2026

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गुरुग्राम/उमा सक्सेना/-   गुरुग्राम स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी में महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ। इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और चिंतकों ने भाग लेकर रामानुजन की गणितीय विरासत और उसके आधुनिक विज्ञान पर पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि रामानुजन की खोजें केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिक भविष्य की मजबूत आधारशिला भी हैं। सम्मेलन का आयोजन एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज और शिक्षा संस्कृति न्यास के सहयोग से किया गया, जिसका मुख्य विषय “रामानुजन की विरासत और भविष्य की पीढ़ियों को उससे मिलने वाली प्रेरणा” रहा।

गणित के आधुनिक आयामों से जुड़ी रामानुजन की प्रतिभा
सम्मेलन के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के रवींद्रनाथ टैगोर ब्लॉक, एसजीटी यूनिवर्सिटी में आयोजित सत्र में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने रामानुजन की प्रसिद्ध नोटबुक्स और उनके जटिल गणितीय सिद्धांतों पर विचार रखे। कृष्णन राजकुमार ने अपने व्याख्यान में रामानुजन के टेलिस्कोपिंग कंटीन्यूड फ्रैक्शंस को 14वीं सदी के महान गणितज्ञ संगमग्राम के माधव के कार्यों से जोड़ते हुए ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। वहीं गजेंद्र प्रताप सिंह ने संयोजनात्मक गणित में रामानुजन के योगदान को समझाते हुए बताया कि पार्टिशन और जनरेटिंग फंक्शन्स पर उनका कार्य आज डेटा साइंस, नेटवर्क थ्योरी और ग्राफ स्पेक्ट्रा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने रामानुजन
सम्मेलन मेंगौरव भटनागर ने कहा कि रामानुजन की प्रतिभा किसी चमत्कार का परिणाम नहीं थी, बल्कि पैटर्न पहचानने की अद्भुत क्षमता थी, जिसे समर्पित छात्र मेहनत और जिज्ञासा से विकसित कर सकते हैं। इसी क्रम में सत्यनारायण रेड्डी ने रामानुजन सम्स के व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला, जबकि ए. स्वामीनाथन ने रामानुजन प्रकार के एंटायर फंक्शन्स पर अपना शोध प्रस्तुत किया। भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए जगदीश बंसल ने कहा कि रामानुजन की सहज समस्या-समाधान क्षमता आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैचारिक आधारशिला मानी जा सकती है।

सम्मेलन का संचालन अशोक कुमार अग्रवाल ने किया और इसमें देशभर के विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। विद्वानों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल गणितीय अनुसंधान को नई दिशा देते हैं, बल्कि युवाओं को विज्ञान और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।

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