पांदा जागीर, देवास से उठी कबीर वाणी की वैश्विक प्रतिध्वनि                               

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-आरजेएस मीडिया बना आध्यात्मिक सेतु

मध्य प्रदेश/उमा सक्सेना/-  मध्य प्रदेश के देवास जिले स्थित पांदा जागीर में आयोजित मालवा कबीर महोत्सव और आध्यात्मिक जनचेतना यात्रा ने इस वर्ष राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन को वैश्विक मंच से जोड़ने में आरजेएस पॉजिटिव मीडिया की अहम भूमिका रही, जिसने भौतिक और वर्चुअल माध्यमों को जोड़ते हुए कार्यक्रम को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाया। विभिन्न राज्यों और देशों से जुड़े दर्शकों ने वेबिनार के माध्यम से कबीर भजनों और विचारों का रसास्वादन किया।

संत कबीर के मानवतावाद को तकनीक से जोड़ने का प्रयास
कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि संत कबीर के मानवतावादी दर्शन को आधुनिक तकनीकी युग से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास था। 21 फरवरी को आयोजित इस फिजिकल और वर्चुअल कार्यक्रम में सतनाम सेवा समिति, पांदा जागीर के सहयोग से यात्रा और महोत्सव की विस्तृत जानकारी साझा की गई। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल आर्काइविंग के माध्यम से संरक्षित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी कबीर वाणी की विरासत से जुड़ सकें।

लोकगायकों की सुरधारा और विचार विमर्श
महोत्सव के दौरान पद्मश्री सम्मानित कबीर लोकगायक प्रह्लाद सिंह टिपानिया की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने बताया कि मालवा कबीर महोत्सव पिछले तीन दशकों से आयोजित किया जा रहा है और बीते पंद्रह वर्षों से निकाली जा रही यात्रा आज भी लोगों में उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा भर रही है। उन्होंने संत कबीर को मानवता, भाईचारे और करुणा का प्रवर्तक बताते हुए उनके संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

चार दिवसीय यह महोत्सव 19 से 22 फरवरी 2026 तक चला, जिसमें देश-विदेश के अनेक लोक कलाकारों ने भाग लिया। आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े कलाकारों सहित विभिन्न क्षेत्रों के गायकों ने कबीर भजनों की प्रस्तुति दी। उत्सव स्थल से लाइव रिपोर्टिंग भी की गई, जिससे दर्शक सीधे कार्यक्रम से जुड़ सके।

सामाजिक सरोकारों पर विशेष जोर
आयोजन में नशामुक्त समाज के निर्माण, सार्वभौमिक साक्षरता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर भी विचार विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि कबीर का संदेश भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय की सीमाओं से परे है। वेबिनार के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे और कबीर के सार्वभौमिक संदेश पर चर्चा की।

मालवा कबीर महोत्सव का समापन 22 फरवरी को इंदौर में निर्धारित किया गया, जहां यात्रा का अंतिम पड़ाव रहा। आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि कबीर की वाणी आज भी समाज को जोड़ने और जागरूक करने की शक्ति रखती है।

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