भारत बंद 2026: नए कानूनों और व्यापार समझौतों के विरोध में देशभर में ताले बंद

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April 16, 2026

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भारत बंद 2026: नए कानूनों और व्यापार समझौतों के विरोध में देशभर में ताले बंद

-10 संगठनों ने की हड़ताल की घोषणा

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  भारत में 12 फरवरी 2026 को व्यापक असर वाला भारत बंद होने की संभावना है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसानों के संगठन ने इस दिन देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सरकारी कार्यालय, परिवहन सेवाएं और कई राज्यों के बाजार प्रभावित हो सकते हैं। कुछ राज्यों में स्कूल और कॉलेज भी बंद रह सकते हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

10 संगठनों ने की हड़ताल की घोषणा
हड़ताल की कॉल केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच से आई है, जिसे किसानों के संगठनों का भी मजबूत समर्थन प्राप्त है। ये किसान और मजदूर नए लेबर कोड्स और प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के 10 संगठनों INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC ने इस हड़ताल की घोषणा की है।

मुद्दों पर जताई चिंता
यूनियनों का कहना है कि पिछले साल लागू हुए चार नए लेबर कोड्स पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह आए हैं। ये नए कोड्स मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं, नौकरी की सुरक्षा घटाते हैं और नियोक्ताओं को कर्मचारियों को भर्ती और निकालने में आसानी प्रदान करते हैं। इसके अलावा यूनियनों ने निजीकरण, वेतन और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर भी चिंता जताई है।

क्या है प्रमुख मांग?
यूनियनों के अनुसार, हड़ताल के नोटिस अधिकांश क्षेत्रों और उद्योगों में भेज दिए गए हैं और तैयारी पूरी तरह से चल रही है। उनकी प्रमुख मांगों में चार लेबर कोड्स को रद्द करना, ड्राफ्ट सीड बिल, इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल और SHANTI एक्ट को वापस लेना, MGNREGA को बहाल करना और 2025 के विकसित भारत– गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन एक्ट को रद्द करना शामिल है।

क्या होगा हड़ताल का असर?
हालांकि अभी देशभर में स्कूल और कॉलेज बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। फिर भी, कुछ राज्यों जैसे केरल, कर्नाटक और ओडिशा में शैक्षणिक संस्थान बंद रह सकते हैं। अगर स्थानीय संगठन बंद का समर्थन करते हैं या परिवहन सेवाओं में बाधा आती है। इस हड़ताल के चलते नागरिकों और व्यवसायों को पूर्व तैयारी करने की सलाह दी गई है। सरकार और यूनियनों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत और समाधान की संभावनाओं पर भी निगाहें बनी हुई हैं।

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