JNU कैंपस में नारेबाजी का वीडियो सामने आते ही गरमाई सियासत    

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 26, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-JNU में छात्र प्रदर्शन बना विवाद की वजह,

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 5 जनवरी 2020 के हिंसक हमले की बरसी पर आयोजित विरोध प्रदर्शन अब एक नए विवाद का कारण बन गया है। देर शाम कैंपस में हुई नारेबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला गरमा गया है। वीडियो में कुछ छात्र केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व को लेकर नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं, जिस पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा एतराज जताया है।

वीडियो वायरल, आरोप-प्रत्यारोप शुरू
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद ABVP ने नारेबाजी को “देश विरोधी सोच” से प्रेरित बताया। संगठन का आरोप है कि इस तरह के नारे हिंदू धर्म और राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति घृणा को दर्शाते हैं। ABVP ने इसे “एंटी-इंडिया माइंडसेट” और “बौद्धिक आतंकवाद” तक करार दिया है, जिससे कैंपस का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।

JNUSU का पलटवार, आरोपों से किया इनकार
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए JNU छात्रसंघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि विरोध के दौरान लगाए गए सभी नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया था और इसे गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का सख्त रुख
विवाद बढ़ने के बाद JNU प्रशासन ने भी बयान जारी कर आपत्तिजनक नारेबाजी की निंदा की है। विश्वविद्यालय ने साफ किया कि किसी भी तरह की हिंसा, गैरकानूनी गतिविधि या कथित देश विरोधी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने ऐसे मामलों में सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसमें निलंबन, निष्कासन और स्थायी प्रतिबंध तक शामिल हो सकता है।

पुलिस से FIR की मांग, कानूनी राय ली जा रही
घटना के बाद देर रात दिल्ली पुलिस को शिकायत सौंपी गई। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। पुलिस मामले में कानूनी सलाह ले रही है। वहीं, JNU के सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज (उत्तर) थाने के SHO को पत्र लिखकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करने का औपचारिक अनुरोध किया है। इस पत्र की प्रतियां विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को भी भेजी गई हैं।

सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में छात्रों के नाम
JNU सुरक्षा विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नारेबाजी के दौरान कुछ नामचीन छात्र मौजूद थे। रिपोर्ट में अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आज़मी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीज़ा खान और शुभम सहित अन्य छात्रों का उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच के बाद जिम्मेदार पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

JNUSU का बयान: असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश
JNUSU ने एक अलग बयान जारी कर इस पूरे विवाद को विश्वविद्यालय की छवि खराब करने की साजिश बताया है। छात्रसंघ का कहना है कि 5 जनवरी 2020 की रात हुए हमले के दोषियों को अब तक सजा नहीं मिली है, जबकि उस घटना की जिम्मेदारी से जुड़े सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। JNUSU के मुताबिक, 2026 में आयोजित यह विरोध प्रदर्शन उसी हिंसा की याद और न्याय की मांग को जीवित रखने के लिए था।

लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर
JNUSU ने दोहराया कि विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त अधिकार हैं। छात्रसंघ ने कहा कि इन अधिकारों को कमजोर करने या दबाने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। साथ ही, मीडिया के एक वर्ग पर आरोप लगाया गया कि उसने प्रदर्शन को तोड़-मरोड़कर पेश किया, जिससे असली मुद्दों से ध्यान हटे।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर JNU कैंपस को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रवाद और अनुशासन के सवाल आपस में टकराते नजर आ रहे हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox