“रामलीला में बिछड़े मासूम को आखिर कैसे मिली मां की गोद?”

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March 8, 2026

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-रामलीला में बिछड़ा 5 साल का मासूम -पुलिस बनी ‘बजरंगी भाईजान’ दशहरा के पावन अवसर पर

नई दिल्ली/द्वारका/उमा सक्सेना/-   द्वारका जिले की रामलीला में पुलिस का खोया-पाया मिशन फिर साबित हुआ कारगर। 5 साल का मासूम बच्चा, जो भीड़ में अपने परिजनों से बिछड़ गया था, सेक्टर-10 द्वारका चौकी के पुलिसकर्मियों की सूझबूझ और मेहनत से आखिरकार अपनी मां की गोद में लौट आया।

मिशन की शुरुआत और पुलिस की तत्परता
डीसीपी द्वारका अंकित सिंह (IPS) के निर्देशन में जिले की हर बड़ी रामलीला में खोया-पाया केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर पुलिस टीम भीड़ में गुम होने वाले बच्चों, बुजुर्गों और जरूरतमंदों की मदद कर उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य त्योहारों में उमड़ी भीड़ को सुरक्षित माहौल देना है।

घटना कैसे घटी
29-30 सितंबर की रात द्वारका रामलीला में दरभंगा, बिहार से आए परिवार का 5 साल का बेटा अचानक गुम हो गया। बच्चा बहुत छोटा होने के कारण अपने माता-पिता का सही पता नहीं बता पा रहा था। इस दौरान सेक्टर-10 चौकी इंचार्ज SI राजत मलिक और उनके साथी HC कमलेश ने न केवल बच्चे को गोद में उठाकर प्यार-दुलार दिया बल्कि उसकी बात समझने की कोशिश भी की।

पुलिस की जद्दोजहद और सफलता
टीम ने लगातार प्रयास करते हुए पार्किंग और मेले के विभिन्न हिस्सों में अनाउंसमेंट कराए, संदेश प्रसारित किए और लोगों से संपर्क साधा। अंततः बच्चे के माता-पिता सड़क पर बेसब्री से उसकी तलाश करते हुए मिल गए। पहचान प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित उसकी मां की गोद में सौंप दिया। इस भावुक पल को देखकर मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

 तकनीक और प्रशासन की पहल
खोया-पाया केंद्रों पर बच्चों और लापता व्यक्तियों की तस्वीरें तुरंत डिजिटल प्लेटफॉर्म और मेले में लगे डिस्प्ले स्क्रीन पर साझा की जाती हैं, जिससे परिवार तक सूचना जल्दी पहुंच सके। यह पहल न केवल पुलिस की संवेदनशीलता को दर्शाती है बल्कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनता को सीधी राहत भी देती है।

जनता की सराहना
लोगों ने इस पहल की जमकर तारीफ की है और कहा कि पुलिस की मौजूदगी से त्योहारों में सुरक्षा का भरोसा और बढ़ा है। यह पहल आने वाले दिनों में भीड़भाड़ वाले आयोजनों में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

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