सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: दिल्ली-एनसीआर से जल्द हटेंगे आवारा कुत्ते, डॉग लवर्स ने जताई आपत्ति

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सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: दिल्ली-एनसीआर से जल्द हटेंगे आवारा कुत्ते, डॉग लवर्स ने जताई आपत्ति

अनीशा चौहान/-   भारत में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से एक जटिल और विवादास्पद मुद्दा रही है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से जल्द-से-जल्द हटाया जाए। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।

विवाद के दो पहलू
एक तरफ, डॉग लवर्स का कहना है कि यह फैसला आवारा कुत्तों के प्रति क्रूरता है, जबकि दूसरी ओर, कुत्तों के हमलों का शिकार बने लोग इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। इस बीच, कुछ विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि भारत में US और यूरोप जैसे देशों में अपनाए गए डॉग मॉडल को लागू किया जा सकता है। लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर पशु कल्याण संगठनों और डॉग लवर्स ने आपत्ति जताई है।

भारत में आवारा कुत्तों की स्थिति
साल 2019 की पशुपालन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आवारा कुत्तों की संख्या 1.53 करोड़ से अधिक थी, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बढ़ती जा रही है। इसके कारण कुत्तों के काटने की घटनाओं और रेबीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। दिल्ली जैसे महानगरों में यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कुत्तों के काटने की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए और कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है।

क्या है US-यूरोप का फॉर्मूला?
US और यूरोप में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कई उपाय अपनाए जाते हैं—

1. पालतू और आवारा कुत्तों के लिए लाइसेंसिंग और टीकाकरण अनिवार्य।

2. आबादी नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर नसबंदी कार्यक्रम।

3. आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखना और गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करना।

4. सड़कों पर अनियंत्रित कुत्तों को खिलाने या लापरवाही बरतने वालों पर जुर्माना।

आपत्तियों के स्वर
डॉग लवर्स और पशु कल्याण संगठनों का कहना है कि इच्छामृत्यु एक क्रूर और अमानवीय तरीका है। उनका मानना है कि नसबंदी और टीकाकरण जैसे मानवीय उपायों से ही इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, भारत में कई लोग आवारा कुत्तों को खिलाने और देखभाल करने को पुण्य का कार्य मानते हैं, ऐसे में सड़क पर खाना खिलाने पर जुर्माना लगाने जैसे कदम सामाजिक विरोध को जन्म दे सकते हैं।

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