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March 5, 2026

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भारत-चीन सीमा के शांतिपूर्ण समाधान पर सहमत

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पिछले 10 दिन से जारी तनाव को देखते हुए दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि दोनो देश सीमा पर तनाव कम करने व शांतिपूर्ण समाधान के लिए सहमत हो गये है साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति का हल निकालने और शांति सुनिश्चित करने और लिए दोनों पक्ष सैन्य और कूटनीतिक तौर पर जुड़े रहेंगे।
                     चुशुल-मोल्दो क्षेत्र में शनिवार को हुई बैठक पर विदेश मंत्रालय ने कहा, दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में शांतिपूर्वक हल निकालने के लिए सहमत हुए हैं। यह फैसला विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों और नेताओं के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए लिया गया है कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। चीन की सीमा के अंतर्गत मोलडो चुशुल में हुई बातचीत करीब साढ़े पांच घंटे चली थी। सूत्रों ने बताया था कि दोनों पक्षों ने अपनी मांग एक दूसरे के सामने रखी है। सूत्रों के मुताबिक बातचीत सकारात्मक माहौल में खत्म हुई है। इससे आगे बातचीत का रास्ता खुला हुआ है। माना जा रहा था कि इस बातचीत में भारत ने दो टूक कहा है कि अप्रैल 2020 की स्थिति सीमा पर कायम हो। वार्ता के दौरान भारत ने चीनी सेना से पीछे हटने को भी कहा है। वहीं, सीमा पर सड़क निर्माण रोकने की चीन की मांग को भी भारत ने खारिज कर दिया है। भारतीय पक्ष की ओर से बातचीत का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया था।

भारत के लिए बुरा नहीं चाहता चीन
भारत और चीन की सेनाओं में लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत से पहले चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा था कि भारत के लिए चीन बुरा नहीं चाहता है।  श्ग्लोबल टाइम्सश् के शुक्रवार को प्रकाशित हुए संपादकीय में लिखा गया था कि चीन भारत के लिए बुरा नहीं चाहता है। पिछले दशकों में अच्छे-पड़ोसी संबंध चीन की मूल राष्ट्रीय नीति रही है, और चीन सीमा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का दृढ़ता से पालन करता रहा है। भारत को अपना दुश्मन बनाने का हमारे पास कोई कारण नहीं है।

एलएसी पर बढ़ा था तनाव
पिछले महीने सिक्किम और लद्दाख सेक्टर में सैकड़ों भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़पों के बाद एलएसी पर तनाव बढ़ गया था। दोनों पक्षों के सेना अधिकारियों ने विवादित सीमा पर कई बैठकें कीं, लेकिन गतिरोध को तोड़ने में असमर्थ रहे।

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