भारत ने बांग्लादेश सरकार को लगाई लताड़, चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी पर जताई आपत्ति

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October 21, 2026

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भारत ने बांग्लादेश सरकार को लगाई लताड़, चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी पर जताई आपत्ति

मानसी शर्मा /- बांग्लादेश में अल्पसंख्यक और खास कर हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हिंदुओं पर हो रही हिंसा के खिलाफ बांग्लादेश के मुखर आवाज ISKCON के धर्मगुरु चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सख्त टिप्पणी की है। विदेश मंत्रालय ने चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी और जमानत ना मिलने पर चिंचा जताई है। साथ ही वहां के कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

गौरतलब है कि सोमवार को बांग्लादेश पुलिस ने ढाका एयरपोर्ट से ISKCON के धर्मगुरु चिन्मय प्रभु को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने उनपर देशद्रोह का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, चिन्मय प्रभु ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय धव्ज का अपमान किया था। हालांकि, मामला कुछ और ही है। हिंदुओं पर हो रही हिंसा के खिलाफ चिन्मय प्रभु लगातार मुखरता से आवाज उठा रहे हैं। वो लगातार पूरे देश में घूमकर हिंदुओं को एकजुट कर रहे हैं। उनके गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में हिंदू सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को दिखाया आईना

विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और जमानत न दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हें। वो बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता भी हैं। यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर कई हमलों के बाद हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “अल्पसंख्यकों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ चोरी और तोड़फोड़ की गई। इतना ही नहीं देवी-देवताओं और मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज हैं।“

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं के अपराधी अभी भी छुपे हुए हैं लेकिन शांतिपूर्ण सभाओं के माध्यम से वैध मांगें पेश करने वाले धार्मिक नेताओं के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। हम श्री दास की गिरफ़्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे अल्पसंख्यकों पर हमलों पर भी चिंता व्यक्त करते हैं।भारत सरकार ने कहा कि हम बांग्लादेश के अधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं, जिसमें शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उनका अधिकार भी शामिल है।”

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