खालिस्तान समर्थकों की कनाडा में विवादित बयानबाजी, गोरे लोगों को देश छोड़ने की दी चेतावनी

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February 14, 2026

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खालिस्तान समर्थकों की कनाडा में विवादित बयानबाजी, गोरे लोगों को देश छोड़ने की दी चेतावनी

मानसी शर्मा /-  कनाडा में खालिस्तान समर्थक आंदोलनों की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इसके चलते देश की सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो रही हैं। हाल ही में एक वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें खालिस्तान समर्थक रैली में एक वक्ता गोरे लोगों से कनाडा छोड़ने की अपील कर रहा है। वह उन्हें यूरोप या इज़रायल वापस जाने की सलाह दे रहा है। यह वीडियो कनाडा के सरे शहर का बताया जा रहा है। इसे कनाडाई पत्रकार डेनियल बोर्डमैन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया।

विवादास्पद बयान से सांस्कृतिक तनाव बढ़ा

वीडियो में सैकड़ों खालिस्तान समर्थक झंडे लहराते हुए रैली कर रहे हैं। रैली में शामिल एक वक्ता यह कहते हुए दिखाई देता है कि कनाडा असल में उनका है। साथ ही, वह यह भी कहता है कि गोरे लोगों को यूरोप या इज़रायल लौट जाना चाहिए। इस बयान ने कनाडा में सांस्कृतिक तनाव को बढ़ावा दिया है। यह टिप्पणी स्थानीय नागरिकों और प्रवासी समुदायों के बीच मतभेद पैदा कर सकती है। इसके बाद, इस विवादास्पद बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया हो रही है, जिससे देश में सामाजिक और राजनीतिक समरसता पर सवाल उठ रहे हैं।

डेनियल बोर्डमैन की प्रधानमंत्री ट्रूडो से सख्त सवाल

इस वीडियो के वायरल होने के बाद, डेनियल बोर्डमैन ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनकी सरकार से सवाल किए हैं। बोर्डमैन ने पूछा कि इस तरह की रैलियों को अनुमति कैसे दी जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि यह घटनाएँ कनाडा की विदेश नीति को कैसे प्रभावित कर सकती हैं। बोर्डमैन का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएँ कनाडा की अंतरराष्ट्रीय छवि और सुरक्षा दोनों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

खालिस्तान समर्थक गतिविधियाँ और भारत-कनाडा संबंध

बोर्डमैन ने प्रधानमंत्री ट्रूडो की विदेश नीति की भी आलोचना की है, खासकर खालिस्तान समर्थकों के प्रति नरमी को लेकर। उनका आरोप है कि ट्रूडो सरकार चरमपंथी गतिविधियों को नियंत्रित करने में नाकाम रही है, जिससे कनाडा में सुरक्षा संकट उत्पन्न हो रहा है। बोर्डमैन का कहना है कि खालिस्तान समर्थकों के प्रति सरकार की ढिलाई न केवल कनाडा की सुरक्षा के लिए खतरे का कारण बन रही है, बल्कि इसका असर भारत-कनाडा संबंधों पर भी पड़ सकता है।

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