370 को निरस्त करना वैध है या अवैध? आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला 

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October 19, 2026

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370 को निरस्त करना वैध है या अवैध? आज सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला 

मानसी शर्मा /- सुप्रीम कोर्ट आज संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की याचिकाओं पर निर्णय लेगा। 2019 में राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने वाले आदेश की संवैधानिकता पर सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बी.आर. गवई और सूर्यकांत की संविधान पीठ फैसला करेगी। 5 सितंबर को दोनों पक्षों की मौखिक दलीलें सुनने के बाद संविधान पीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर की केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति “अस्थायी” है और कि कोई सटीक समय सीमा नहीं दे सकती है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संविधान पीठ का निर्णय चाहे जो भी हो, “ऐतिहासिक” होगा और कश्मीर घाटी के लोगों के मन में मौजूद “मनोवैज्ञानिक द्वंद्व” को समाप्त कर देगा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 की प्रकृति से उत्पन्न भ्रम, कि विशेष प्रावधान स्थायी या अस्थायी हैं, ने यह “मनोवैज्ञानिक द्वंद्व” पैदा किया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा के भंग होने के बाद संविधान का अनुच्छेद 370 स्थायी है।

मार्च 2020 में, याचिकाकर्ताओं ने इस मुद्दे को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ को सौंपने का दावा किया, लेकिन पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। तत्कालीन सीजेआई एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि प्रेम नाथ कौल और संपत प्रकाश मामले में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए पहले के फैसले अनुच्छेद 370 की व्याख्या से विरोधाभासी नहीं थे। 5 अगस्त 2019 को, अनुच्छेद 370 को केंद्र सरकार ने हटा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में इसकी जानकारी दी। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया, पहला जम्मू-कश्मीर था, और दूसरा लद्दाख था। संसद को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधान लिंग, वर्ग, जाति और मूल स्थान पर भेदभावपूर्ण हैं।

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