नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 23 मई 2025 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में निचले पायदान पर कार्यरत सिपाहियों हवलदारों व उप-निरीक्षकों को रिटायरमेंट जाते वक्त ऑनरेरी रैंक से सम्मानित करने का आदेश जारी कर दिया है ताकि जब जवान अपने गांव में जाएगा तो उसके सगे संबंधियों व समाज में उसको मान सम्मान की दृष्टि से देखा जाएगा हालांकि कि उसको वित्तिय लाभ नहीं मिलेगा।

अलॉइंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में माननीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश का स्वागत किया लेकिन दुख हुआ जब कम्पनी व बटालियन लेवल के हजारों कमान अधिकारियों को मानद रैंक जैसे सम्मान से वंचित रखा गया। क्या इससे सरहदी बीओपी पर कमान संभालें कम्पनी व बटालियन कमान अधिकारियों, नक्सलवाद, मणिपुर इमरजेंसी, कश्मीर आतंकवाद से लोहा लेते कम्पनी कमांडर, डिप्टी कमांडेंट (ऑपरेशन) द्वितीय कमान अधिकारियों के मान सम्मान को ठेस पहुंचेगी ये गंभीर सवाल मुंह बाए खड़ा है। इस आदेश से ऐसा प्रतीत होता है कि निचले स्तर पर कार्यरत जवानों व उपरी स्तर के अधिकारियों में खाई बढ़ेगी जबकि इस प्रकार के मानद रैंक से सरकार को कोई धेला खर्च नहीं करना पड़ेगा फिर क्यों उपरी स्तर के अधिकारियों को मानद रैंक देने में कोताही बरती गई।

पूर्व एडीजी सीआरपीएफ श्री एचआर सिंह के कहे अनुसार सहायक कमांडेंट से डिप्टी कमांडेंट, कमांडेंट को अगला प्रमोशन लेने में 10 से 15 सालों तक का लम्बा इंतजार करना पड़ता है। हमारी एसोसिएशन मांग करती है उपरी स्तर के अधिकारियों जिनमें कमांडेंट, डीआईजी, आईजी तक के सभी रैंकों को मानद रैंक प्रदान किए जाएं ताकि सेवानिवृत्ति उपरांत समाज में आत्मसम्मान व गर्व की जिंदगी गुजार सकें। इससे ना केवल उच्च अधिकारियों का मान सम्मान व मनोबल बढ़ेगा बल्कि नई उर्जा के साथ विभिन्न ऑपरेशन में बेहतर रणनीति के चलते अभियानों में सफलता मिलेगी।


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