भगवान कृष्ण व हनुमान भी थे दुनिया के बेहतरीन राजनयिक – मंत्री जयशंकर

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August 25, 2026

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भगवान कृष्ण व हनुमान भी थे दुनिया के बेहतरीन राजनयिक – मंत्री जयशंकर

-बोले- कोई और पीएम होता तो मुझे मंत्री नही बनाता, मोदी को लेकर जयशंकर ने खुलकर बात की

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- मोदी सरकार में विदेश मंत्री का पद संभाल रहे जयशंकर ने पहली बार प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी को लेकर खुलकर बात करते हुए कहा कि विदेश सचिव बनना उनकी महत्वकांक्षा थी लेकिन मंत्री बनने का उनका सपना नही था लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हे विदेश मंत्री बनाकर उन्हे भी अचंभित कर दिया था। और यह सब मोदी ही कर सकते है। अगर कोई और पीएम होता तो शायद यह मुमकिन नही होता। उन्होने इसी परिप्रेक्ष्य में भगवान श्री कृष्ण व हनुमान को दुनिया का बेहतरीन राजनयिक भी बताया। जिन्होने शांति के लिए बड़े कदम उठाने में भी संकोच नही किया।
               पुणे में अपनी किताब ’द इंडिया वेः स्ट्रैटजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड’ के मराठी वर्जन ’भारत मार्ग’ की लॉन्चिंग के एक कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा कि मंत्री बनने से पहले तक विदेश सचिव बनना उनकी महत्वाकांक्षा की सीमा थी। उन्होंने कहा, “मेरे लिए विदेश सचिव बनना मेरी महत्वाकांक्षा की सीमा थी। मैंने कभी मंत्री बनने के बारे में सोचा तक नहीं।“
               जयशंकर ने आगे विदेशी संबंधों पर बात करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान हनुमान दुनिया के सबसे बेहतरीन राजनयिक थे। उन्होंने कहा, “मैं यह बात गंभीरता से कह रहा हूं। अगर कोई उनके राजनयिकता के परिप्रेक्ष्य को देखेगा कि जिस स्थिति में वे थे, किस तरह के मिशन उन्हें सौंपे गए। कैसे उन्होंने स्थिति को संभाला। तो यह समझ में आएगा कि हनुमानजी अपने मिशन से भी आगे गए थे। उन्होंने माता सीता से संपर्क किया। लंका दहन किया। वे एक बहु-उद्देशीय राजनयिक थे।“  
               जयशंकर ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जो कुछ चल रहा है, उसके जैसी ही 10 अवधारणाएं वे महाभारत के जरिए दे सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर आज आप कहते हैं कि यह बहु-ध्रुवीय दुनिया है, तो महाभारत के वक्त भी ऐसा ही कुछ था। तब जो कुछ भी कुरुक्षेत्र में चल रहा था, वह बहुध्रुवीय भारत का उदाहरण है। जहां अलग-अलग राजशासन थे। उनकी तरफ से कहा जाता था कि आप हमारे साथ हैं, आप उनके साथ हैं। वहीं, बलराम और रुक्मा जैसे कुछ निष्पक्ष भी थे।“

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